नयी दिल्ली, 21 जुलाई (भाषा) प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने मंगलवार को कहा कि उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम को कभी-कभी ‘‘बहुत सतही आलोचना’’ का सामना करना पड़ता है, खासकर उन लोगों से जिन्हें न्यायिक प्रणाली के कामकाज के बारे में वास्तव में कोई जानकारी नहीं होती।
सीजेआई ने कहा कि संवैधानिक अदालतों में नियुक्ति के लिए न्यायाधीशों का चुनाव करने के संबंध में कोई भी फैसला लेते समय कॉलेजियम कई आवश्यक और अहम पहलुओं पर गौर करता है।
उन्होंने कहा कि ‘‘उच्चतम न्यायालय में पदोन्नति के लिए एक अहम पहलू हमेशा समावेशिता और विविधता का विचार होता है’’।
प्रधान न्यायाधीश ने यह विचार सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए व्यक्त किये। यह कार्यक्रम न्यायमूर्ति शील नागू, न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर, न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा, न्यायमूर्ति अरुण पल्ली और न्यायमूर्ति वी. मोहना के सम्मान में आयोजित किया गया था, जिन्होंने पिछले महीने शीर्ष अदालत के न्यायाधीश के तौर पर शपथ ली थी।
न्यायमूर्ति कांत ने कहा, ‘‘मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम को कभी-कभी बहुत ही सतही आलोचना का सामना करना पड़ता है—विशेषकर उन लोगों द्वारा जिन्हें वास्तव में न्यायिक प्रणाली की कार्यप्रणाली की जानकारी नहीं है। वे यह नहीं जानते कि कॉलेजियम व्यवस्था कैसे विकसित हुई है और इसमें किन मानदंडों, कारकों तथा मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाता है
उन्होंने कहा कि जब कॉलेजियम उच्चतम न्यायालय में पदोन्नति के लिए नामों की सिफारिश करता है, तो कई बातों का संज्ञान लेता है, जैसे कि उनका कामकाज, न्यायाधीश के तौर पर अब तक की सेवा की अवधि, पहले संभाले गए पद और यहां तक कि उनके पेशेवर जीवन भी।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि उनका व्यक्तिगत तौर पर मानना है कि जो न्यायाधीश उच्चतम न्यायालय में आते हैं, उन पर न्यायिक व्यवस्था में लोगों का भरोसा और विश्वास बनाए रखने और समय के साथ उसे मजबूत करने की जिम्मेदारी होती है।
उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय में पदोन्नति के साथ एक और ज़िम्मेदारी संवैधानिक न्यायशास्त्र का विकास करना है।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, ‘‘यह अदालत मुख्य रूप से केवल आपराधिक या दीवानी मामलों का फैसला करने के लिए नहीं है। उच्चतम न्यायालय से संवैधानिक न्यायशास्त्र को विकसित करने की उम्मीद की जाती है।’’
उन्होंने इन पांच नए न्यायाधीशों की शीर्ष अदालत में नियुक्ति के लिए निष्पक्ष और योग्यता-आधारित फैसला लेने के लिए उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम का धन्यवाद किया।
इस कार्यक्रम में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के पद की दो जून को शपथ लेने वाले पांच न्यायाधीशों, अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी, एससीबीए के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने भी संबोधित किया।
न्यायमूर्ति मोहना ने अपने संबोधन में कहा कि यह उनके लिए बहुत भावुक पल था, वह देश की दूसरी ऐसी महिला हैं, जिन्हें सीधे बार से उच्चतम न्यायालय में पदोन्नत किया गया है।
भाषा धीरज दिलीप
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