नयी दिल्ली, चार फरवरी (भाषा) राज्यसभा में बुधवार को कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल द्वारा सत्र के दौरान संसद के बाहर भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर प्रेस वार्ता करने पर चिंता व्यक्त की।
तिवारी ने शून्यकाल के दौरान नियम 258 का हवाला देते हुए कहा, “सदन नियमों और परंपराओं के अनुसार चलता है। सदन की परंपरा रही है कि जब संसद का सत्र चल रहा हो, तो नीतिगत मुद्दों को सदन के बाहर नहीं उठाया जा सकता। हालांकि, कल वाणिज्य मंत्री ने व्यापार समझौते पर प्रेस वार्ता की।”
सभापति सी पी राधाकृष्णन ने व्यवस्था के प्रश्न को खारिज करते हुए कहा कि मंत्री को बुधवार को ही सदन में इस मुद्दे पर बयान देना था। उन्होंने कहा, “मंत्री आज बयान देने वाले हैं, इसलिए व्यवस्था का कोई प्रश्न नहीं है।”
इस पर तिवारी ने जोर देकर कहा कि वह मंगलवार की बात को लेकर चिंता जता रहे हैं।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कांग्रेस सदस्य की आपत्ति को स्वीकार करते हुए कहा कि वह व्यवस्था के प्रश्न से सहमत हैं और ऐसी परंपरा मौजूद है।
रीजीजू ने कहा “कल लोकसभा में (व्यापार समझौते पर) बयान देने का कार्यक्रम था। हालांकि, परिस्थिति ऐसी बनी कि बयान देना संभव नहीं हो सका। आज राज्यसभा और लोकसभा दोनों जगह बयान दिया जाएगा।”
तिवारी के बार-बार आग्रह करने के बावजूद सभापति ने इस विषय पर आगे की चर्चा की अनुमति नहीं दी।
बाद में, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य जॉन ब्रिटास ने नियम 267 के तहत व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर चर्चा के लिए निर्धारित कार्यवाही को स्थगित करने की मांग की।
सभापति ने इसे खारिज करते हुए कहा, “आप नियम 267 के आधार पर खुद को सही बता रहे हैं। पहले ही इस संबंध में फैसला दिया जा चुका है। बहुत ही आपातकालीन स्थिति को छोड़कर नियम 267 के तहत कोई प्रस्ताव नहीं रखा जाएगा। मैंने सदन को विश्वास में ले लिया है, नियम 267 लागू नहीं होगा।” इसके बाद शून्यकाल जारी रहा।
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माधव मनीषा
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