नीट पीजी दाखिला प्रणाली की आंतरिक ऑडिट के लिए समिति गठित की गई: केंद्र

नीट पीजी दाखिला प्रणाली की आंतरिक ऑडिट के लिए समिति गठित की गई: केंद्र

नीट पीजी दाखिला प्रणाली की आंतरिक ऑडिट के लिए समिति गठित की गई: केंद्र
Modified Date: August 4, 2026 / 07:45 pm IST
Published Date: August 4, 2026 7:45 pm IST

नयी दिल्ली, चार अगस्त (भाषा) केंद्र सरकार ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय में कहा कि उसने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातकोत्तर (नीट-पीजी) के जरिए होने वाली दाखिला प्रक्रिया की मौजूदा व्यवस्था का व्यापक ऑडिट कराने की रूपरेखा तैयार करने के लिए स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (डीजीएचएस) की अध्यक्षता में एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति गठित की है।

न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ नीट-पीजी 2025 के लिए न्यूनतम अर्हता प्रतिशत (कट-ऑफ) घटाए जाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने पीठ को बताया कि न्यायालय के मौखिक निर्देश के बाद केंद्र ने 23 जुलाई की अधिसूचना के जरिए 12 सदस्यीय समिति का गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता डीजीएचएस करेंगे।

उन्होंने दलील दी कि समिति का कार्यक्षेत्र नीट के माध्यम से होने वाली मौजूदा दाखिला प्रक्रिया की आंतरिक ऑडिट की रूपरेखा तैयार करना, व्यवस्था में कमियों का पता लगाना तथा उनके व्यावहारिक और लागू किए जा सकने वाले समाधान सुझाना होगा।

पीठ ने केंद्र की इस दलील को रिकॉर्ड में शामिल करते हुए समिति को अपनी रिपोर्ट दाखिल करने के लिए आठ सप्ताह का समय दिया।

न्यायालय ने कहा, ‘‘रिपोर्ट आने के बाद हम इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा करेंगे।’’

शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि समिति आवश्यकता पड़ने पर भारतीय चिकित्सा प्रणाली के लिए राष्ट्रीय आयोग (एनसीआईएसएम) और राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग (एनसीएच) के सदस्यों को भी अपने साथ जोड़ सकती है।

इससे पहले, शीर्ष अदालत ने कहा कि वह इस बारे में पड़ताल करेगी कि नीट-पीजी 2025-26 के लिए अर्हता अंक में की गई बड़ी कटौती से स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा के स्तर पर कोई प्रभाव पड़ता है या नहीं।

पूर्व में, न्यायालय ने यह भी कहा था कि केंद्र का यह तर्क सही है कि नीट-पीजी एमबीबीएस में प्रवेश के लिए परीक्षा नहीं है और सभी अभ्यर्थी पहले से चिकित्सक हैं, लेकिन इसके बावजूद वह कट-ऑफ कम करने के प्रभाव पर गौर करना चाहती है।

सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन, डॉ. सौरव कुमार, डॉ. लक्ष्य मित्तल और डॉ. आकाश सोनी ने शीर्ष अदालत में याचिकाएं दायर कर कहा है कि कट-ऑफ में कमी संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन है।

मामले में, देवगन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पिंकी आनंद और अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत पेश हुए।

याचिकाकर्ताओं ने राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान परीक्षा बोर्ड (एनबीईएमएस) की 13 जनवरी की अधिसूचना को चुनौती दी है, जिसके तहत नीट-पीजी 2025-26 की तीसरे दौर की काउंसिलिंग के लिए न्यूनतम अर्हता प्रतिशत घटाया गया था।

मामले में दाखिल हलफनामे में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक ने कहा कि याचिकाकर्ताओं की चुनौती राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग अधिनियम, 2019 के तहत सक्षम वैधानिक प्राधिकारों द्वारा जनहित में लिए गए शैक्षणिक और नीतिगत निर्णय से संबंधित है, जो विशेषज्ञ संस्थाओं के अधिकार क्षेत्र का विषय है।

केंद्र ने दलील दी कि नीट-पीजी के अर्हता प्रतिशत में कमी पहली बार नहीं की गई है। वर्ष 2017 में परीक्षा शुरू होने के बाद से सीटें रिक्त रहने से बचाने के लिए जरूरत के अनुसार कट-ऑफ में कमी की जाती रही है। शैक्षणिक सत्र 2023 में भी सभी श्रेणियों के लिए अर्हता प्रतिशत शून्य कर दिया गया था। इसलिए वर्तमान निर्णय स्थापित नीति और प्रशासनिक परंपरा के अनुरूप है।

पूर्व में, एनबीईएमएस ने शीर्ष अदालत को बताया था कि अर्हता प्रतिशत घटाए जाने के बाद नीट-पीजी 2025 की काउंसिलिंग के लिए 95,913 अतिरिक्त अभ्यर्थी पात्र हो गए हैं।

भाषा सुभाष पवनेश

पवनेश


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