मध्यप्रदेश में अवैध पेड़ कटाई के दावे की जांच के लिए समिति गठित

मध्यप्रदेश में अवैध पेड़ कटाई के दावे की जांच के लिए समिति गठित

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  • Publish Date - January 19, 2026 / 08:57 PM IST,
    Updated On - January 19, 2026 / 08:57 PM IST

नयी दिल्ली, 19 जनवरी (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने मध्यप्रदेश में पेड़ों की अवैध कटाई संबंधी दावों की जांच के लिए एक समिति गठित की है और उसे इस सिलसिले में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

एनजीटी ने मध्यप्रदेश राज्य सहित कई प्राधिकारों से जवाब मांगा। उसने राज्य के शीर्ष वन अधिकारी को अवैध कटाई के लिए जिम्मेदार “अधिकारियों” के खिलाफ की गई कार्रवाई के बारे में एक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।

एनजीटी मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम वन प्रभाग में सागौन और सतकटा सहित 1,242 से अधिक पेड़ों की अवैध कटाई का आरोप लगाने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

इस याचिका में दावा किया गया है कि अवैध रूप से काटे गए पेड़ों के लट्ठों का मूल्य 2.4 करोड़ रुपये से अधिक था।

न्यायिक सदस्य शिव कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल की पीठ ने 17 जनवरी को पारित आदेश में कहा कि पिछले साल 14 सितंबर को “सक्षम अधिकारी” की निरीक्षण रिपोर्ट से पता चला कि पेड़ों की अवैध रूप से कटाई की गई थी, जिससे राज्य के खजाने को अनुमानित 2.4 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ।

पीठ ने कहा, “पर्यावरण से संबंधित एक अहम मुद्दा उठाया गया है” और नर्मदापुरम के जिलाधिकारी, मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीपीसीबी) के सदस्य सचिव, नर्मदापुरम नगर निगम के आयुक्त, संभागीय वन अधिकारी और मुख्य वन संरक्षक सहित अन्य अधिकारियों के माध्यम से मध्यप्रदेश राज्य को प्रतिवादी या पक्षकार के रूप में शामिल किया गया है।

पीठ ने कहा, “प्रतिवादियों को नोटिस जारी करें, जिसका जवाब चार हफ्ते के भीतर देना होगा।”

मामले की “गंभीरता” को रेखांकित करते हुए न्यायाधिकरण ने राज्य के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ), पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के भोपाल क्षेत्रीय कार्यालयों के प्रतिनिधियों और एमपीपीसीबी के सदस्य सचिव को मिलाकर एक संयुक्त समिति का गठन किया है।

एनजीटी ने कहा, “समिति को घटनास्थल का दौरा करने और मामले की जांच करने का निर्देश दिया जाता है, जिसके बाद चार हफ्ते के भीतर तथ्यात्मक और अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट पेश की जानी चाहिए। राज्य पीसीबी समन्वय और लॉजिस्टिक सहायता के लिए नोडल एजेंसी होगी।”

न्यायाधिकरण ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 अप्रैल की तारीख निर्धारित की।

भाषा पारुल प्रशांत

प्रशांत