तिरुवनंतपुरम, 20 जनवरी (भाषा) केरल विधानसभा के मंगलवार को शुरू हुए बजट सत्र में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने वामपंथी सरकार का नीतिगत दस्तावेज पढ़ा, जिसमें दावा किया गया कि राज्य पर लगाए गए ‘आर्थिक प्रतिबंधों के कारण राज्य वित्तीय दबाव’ में है।
केरल में 15 वीं विधानसभा के 16 वें सत्र की शुरुआत में नीतिगत संबोधन में आर्लेकर ने कहा कि राज्य की ऋण लेने की सीमा पर प्रतिबंध और एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर में समायोजन के कारण उसे 2025-26 वित्तीय वर्ष में 17,000 करोड़ रुपये से वंचित रहना पड़ा।
इसके अलावा, उन्होंने कहा कि ‘सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) पद्धति’ के कारण इसे 4,250 करोड़ रुपये का अतिरिक्त ‘नुकसान’ हुआ है, जो 15वें वित्त आयोग की स्वीकृत सिफारिशों से भिन्न है।
आर्लेकर ने कहा कि इन चिंताओं को केंद्र सरकार के समक्ष उठाया गया है।
उन्होंने कहा कि केरल द्वारा उठाई गई चिंताओं में ‘शक्तियों का अत्यधिक केंद्रीकरण’ और राज्य के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले विषयों में केंद्र सरकार का ‘हस्तक्षेप’ भी शामिल है।
राज्यपाल ने सुबह नौ बजे शुरू हुए नीतिगत संबोधन के शुरुआती एक घंटे के दौरान कहा कि केंद्र सरकार द्वारा की गई कटौती के बावजूद, राज्य ने 12 प्रतिशत की वृद्धि हासिल की और पिछले दशक में अपने उत्पादन को दोगुना कर दिया।
राज्यपाल ने स्वास्थ्य, शिक्षा और अवसंरचना विकास जैसे विभिन्न क्षेत्रों में राज्य सरकार की उपलब्धियों तथा उन्हें और विकसित करने के लिए की जा रही पहलों का भी विस्तार से वर्णन किया।
विधानसभा के कैलेंडर के अनुसार, 16वां सत्र 20 जनवरी से 26 मार्च तक 32 दिनों के लिए चलेगा।
राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा 22 और 27 जनवरी को होगी।
केरल के वित्त मंत्री के.एन. बालगोपाल 29 जनवरी को सदन में सालाना बजट पेश करेंगे।
भाषा यासिर मनीषा
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