नयी दिल्ली, 11 मार्च (भाषा) राज्यसभा में बुधवार को आम आदमी पार्टी के एक सदस्य ने विदेशों में जा कर अच्छी शिक्षा एवं रोजगार पाने के इच्छुक युवाओं के फर्जी आव्रजन एजेंसियों और विश्वविद्यालयों की जालसाजी के शिकार हो जाने पर चिंता जाहिर करते हुए सरकार से इस समस्या के समाधान के लिए एक स्थायी वैश्विक सुरक्षा प्रोटोकॉल बनाने तथा शिक्षा एवं रोजगार के लिए एक सत्यापित समर्पित पोर्टल बनाने की मांग की।
शून्यकाल के दौरान आम आदमी पार्टी के डॉ अशोक कुमार मित्तल ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि विदेशों में अच्छी शिक्षा पाने के इच्छुक छात्र कई बार धोखाधड़ी के शिकार हो जाते हैं, तो कभी वे फर्जी आव्रजन एजेंसियों और फर्जी रोजगार एजेंसियों के चंगुल में फंस जाते हैं।
उन्होंने कहा कि पिछले पांच साल में चंडीगढ़ में आव्रजन धोखाधड़ी के 733 मामले में 74 करोड़ रुपये की ठगी हुई। ‘‘सरकार ने करीब 3000 एजेंटों को जांच के बाद अवैध घोषित किया। लेकिन फिर भी सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों के जरिये युवाओं को लुभाने का सिलसिला जारी है।’’
मित्तल ने कहा कि दक्षिण पूर्वी एशिया में 20 हजार भारतीयों को बंधक बना कर अमानवीय परिस्थितियों में रखा गया है जो फर्जी आव्रजन एजेंसियों और फर्जी रोजगार एजेंसियों के शिकार हुए हैं। ‘‘इनमें से कई युवाओं ने विदेश जाने के लिए पूंजी जुटाने की खातिर या तो अपनी जमीन बेची या उनके अभिभावकों को कर्ज लेना पड़ा।’’
उन्होंने कहा कि रूस यूक्रेन युद्ध शुरु होने के बाद 202 भारतीय युवाओं को रूसी सेना में भर्ती कराया गया जिनमें से 26 की मौत हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि ईरान और अमेरिका-इजराइल युद्ध के कारण उत्पन्न तनाव के बीच ओमान की खाड़ी में एक तेल टैंकर पर हुए हमले में दो भारतीय नाविकों की मौत हो गई है और एक अन्य लापता है। ‘‘विडंबना यह है कि मृतकों के शव भी उनके परिवार को नहीं मिल पाए हैं।’’
मित्तल ने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष की वजह से हवाई सक्षेत्रों में प्रतिबंध लग गया और वाणिज्यिक उड़ानें बंद हैं जिसके चलते करीब 12 हजार भारतीय संयुक्त अरब अमीरात में फंसे हुए हैं।
उन्होंने सरकार से मांग की कि ऐसी स्थिति के लिए एक स्थायी वैश्विक सुरक्षा प्रोटोकॉल बनाया जाए ताकि अपरिहार्य स्थिति में भारतीय अपने बारे में सूचना दे पाएं और उन्हें तत्काल जोखिम वाले स्थानों से निकाला जाए।
मित्तल ने कहा ‘‘विदेशी यूनिवर्सिटी की प्रमाणिकता की जांच के लिए शिक्षा संबंधी एक पोर्टल बनाया जाए। विदेशों में रोजगार के लिए भी एक सत्यापित एवं समर्पित पोर्टल बनाया जाए ताकि उस शैक्षिक संस्थान या कंपनी के बारे में पूरी जानकारी मिल सके जहां युवा जाना चाहते हैं।’’
भाषा मनीषा हक
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