West Bengal Assembly Elections: बंगाल में टूटे सारे रिकॉर्ड! आजादी के बाद पहली बार हुआ इतना मतदान, इन मायनों में अब रोचक हुई BJP-TMC की जंग

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बंगाल में टूटे सारे रिकॉर्ड! आजादी के बाद पहली बार हुआ इतना मतदान, West Bengal Assembly Election Analysis

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  • Publish Date - April 29, 2026 / 10:08 PM IST,
    Updated On - April 29, 2026 / 10:29 PM IST

कोलकाताः West Bengal Assembly Elections: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में इस बार रिकॉर्ड मतदान दर्ज किया गया है, जिसने पूरे सियासी परिदृश्य को और गरमा दिया है। दो चरणों में हुए चुनाव में कुल 92.47 प्रतिशत वोटिंग हुई, जो राज्य के इतिहास में अब तक का सबसे अधिक मतदान माना जा रहा है। बुधवार को दूसरे और अंतिम चरण में 91.66 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जबकि कई जगहों पर मतदान समाप्त होने के बाद भी मतदाता कतारों में खड़े नजर आए। दक्षिण बंगाल की 142 सीटों पर हुए इस चरण में कोलकाता में करीब 87 प्रतिशत और पूर्वी बर्धमान में 92.46 प्रतिशत मतदान हुआ, जो इस बात का संकेत है कि इस बार मतदाता पूरी तरह सक्रिय रहे और चुनाव को लेकर कोई उदासीनता नहीं दिखाई। इससे पहले 23 अप्रैल को हुए पहले चरण में भी 93.19 प्रतिशत मतदान हुआ था, जिससे साफ है कि पूरे चुनाव में मतदाताओं की भागीदारी अभूतपूर्व रही। अब 4 मई को होने वाली मतगणना पर सबकी नजरें टिकी हैं।

इस बार के चुनाव में दक्षिण बंगाल खास तौर पर राजनीतिक मुकाबले का केंद्र बना रहा, जहां 2021 में तृणमूल कांग्रेस का दबदबा रहा था। भाजपा ने इसी क्षेत्र में सेंध लगाने के लिए पूरी ताकत झोंकी, जबकि टीएमसी ने अपने गढ़ को बचाने के लिए पूरी रणनीति के साथ मैदान संभाला। खासकर भवानीपुर सीट इस चुनाव की सबसे अहम और प्रतिष्ठित सीट बनकर उभरी, जिसे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का राजनीतिक गढ़ माना जाता है। यह मुकाबला कहीं न कहीं 2021 के नंदीग्राम चुनाव की याद भी दिलाता है, जहां ममता बनर्जी को हार का सामना करना पड़ा था। इस बार उनकी कोशिश अपने गढ़ को मजबूत बनाए रखने की है, जबकि भाजपा इसे मनोवैज्ञानिक बढ़त के रूप में देख रही है।

प्रमुख दलों ने एक-दूसरे पर लगाए ये आरोप

चुनाव के दौरान कई जगहों पर तनाव, आरोप-प्रत्यारोप और झड़पों की घटनाएं भी सामने आईं, जिसने चुनावी माहौल को और गर्म कर दिया। टीएमसी ने केंद्रीय बलों और चुनावी तंत्र के दुरुपयोग का आरोप लगाया, वहीं भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे टीएमसी की घबराहट बताया। कुछ स्थानों पर लाठीचार्ज और नारेबाजी की घटनाएं भी हुईं, जिससे कानून-व्यवस्था पर सवाल उठे। इसके अलावा भाजपा ने कुछ बूथों पर ईवीएम से छेड़छाड़ के आरोप लगाते हुए पुनर्मतदान की मांग की है, जबकि निर्वाचन अधिकारियों ने कहा है कि शिकायतों की जांच के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।

भारी मतदान के सियासी मायने

भारी मतदान को लेकर दोनों दल अपने-अपने तरीके से राजनीतिक अर्थ निकाल रहे हैं। टीएमसी इसे अपनी नीतियों, योजनाओं और ममता बनर्जी के नेतृत्व पर जनता के भरोसे का संकेत मान रही है, जबकि भाजपा इसे सत्ता विरोधी लहर और बदलाव की इच्छा के रूप में देख रही है। कुल मिलाकर, रिकॉर्ड मतदान ने यह साफ कर दिया है कि इस बार मुकाबला बेहद कड़ा है और नतीजे भी उतने ही चौंकाने वाले हो सकते हैं। अब देखना यह है कि 4 मई को मतगणना के बाद राज्य की सत्ता किसके हाथ में जाती है? ममता बनर्जी लगातार चौथी बार सरकार बना पाती हैं या भाजपा बंगाल की राजनीति में नया इतिहास रचती है?

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