चेन्नई, सात मई (भाषा) टीवीके को बहुमत न मिलने के कारण तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए विजय को बुलाने में राज्यपाल द्वारा कथित देरी करने को लेकर कांग्रेस और भाजपा नेताओं के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है।
तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) ने 23 अप्रैल को हुए चुनावों में 234 सदस्यीय विधानसभा में 108 सीट जीतीं और वह सबसे बड़े दल के रूप में उभरी। पांच विधायकों वाली कांग्रेस ने टीवीके को समर्थन दिया है, लेकिन अभिनेता से नेता बने विजय के नेतृत्व वाली पार्टी बहुमत के 118 के आंकड़े तक पहुंचने से अब भी कुछ सीट दूर है।
विजय बुधवार से दो बार राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मुलाकात कर चुके हैं। राज्यपाल ने विजय को बताया है कि उनके पास सरकार गठन के लिए जरूरी बहुमत नहीं है।
इससे कांग्रेस और भाजपा के बीच यह बहस छिड़ गई है कि क्या राज्यपाल को टीवीके को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने से पहले बहुमत साबित करने पर जोर देना चाहिए।
कांग्रेस नेताओं ने विजय को सरकार बनाने के लिए बुलाने में हुई ‘‘देरी’’ को केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा जानबूझकर की गई साजिश बताया, और इसे जनता के फैसले के खिलाफ ‘‘अलोकतांत्रिक’’ रणनीति करार दिया है।
दूसरी ओर, भाजपा नेताओं ने राज्यपाल के इस कदम को उचित ठहराते हुए ‘‘संवैधानिक विवेक’’ पर जोर दिया है।
कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने आरोप लगाया, ‘‘एक पूर्व भाजपा नेता को राज्यपाल बनाकर भाजपा द्वारा सबसे बड़ी पार्टी को सत्ता से वंचित करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। विजय को तुरंत आमंत्रित किया जाना चाहिए; संख्या बल का परीक्षण विधानसभा में किया जा सकता है, राजभवन में नहीं।’’
भाजपा प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने कहा, ‘‘राज्यपाल को कानून के अनुसार अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना चाहिए। परंपरा के अनुसार, राज्यपाल चुनाव पूर्व गठबंधन में विजयी हुई पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इसके अलावा, यदि सबसे बड़ी पार्टी सरकार बनाने की इच्छा व्यक्त करती है, तो संविधान के अनुच्छेद 164 के तहत राज्यपाल का यह दायित्व है कि वह सत्यापित करें कि अन्य पार्टियों या निर्वाचित सदस्यों द्वारा दिया गया समर्थन संतोषजनक है या नहीं।’’
भाषा
शफीक नरेश
नरेश