हत्या और दंगा मामलों में गिरफ्तार कांग्रेस के नंदीग्राम उम्मीदवार को अदालत में पेश किया जाएगा

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हत्या और दंगा मामलों में गिरफ्तार कांग्रेस के नंदीग्राम उम्मीदवार को अदालत में पेश किया जाएगा

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  • Publish Date - September 19, 2026 / 03:02 PM IST,
    Updated On - September 19, 2026 / 03:02 PM IST

कोलकाता, 19 सितंबर (भाषा) पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम में 2007 में जमीन अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के दौरान दंगा, हत्या और आपराधिक धमकी से जुड़े कम से कम चार मामलों में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार मिलन प्रधान को शनिवार को अदालत में पेश किया जाएगा। पुलिस ने यह जानकारी दी।

प्रधान नंदीग्राम सीट पर उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार हैं।

पार्टी ने प्रधान की गिरफ्तारी के विरोध में कोलकाता में एक रैली आयोजित करने का फैसला किया है।

प्रधान को शुक्रवार शाम पश्चिम बंगाल के पूर्वी मेदिनीपुर जिले के चांदीपुर स्थित एक होटल से पार्टी के एक अन्य नेता सुभाशीष भट्टाचार्य के साथ गिरफ्तार किया गया था।

पुलिस ने भट्टाचार्य को इसलिए गिरफ्तार किया था, क्योंकि उनपर प्रधान की गिरफ्तारी में बाधा डालने का आरोप है।

अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘प्रधान को 2007 में दर्ज चार मामलों के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था… ये मामले दंगा, हत्या और आपराधिक धमकी से जुड़े हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इनमें तीन नंदीग्राम और एक खेजुरी थाने में दर्ज मामले शामिल हैं… ये मामले भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और शस्त्र अधिनियम की धाराओं के तहत दर्ज किए गए थे। उन्हें आज हल्दिया के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा।’’

पश्चिम बंगाल पुलिस ने शनिवार को कहा कि प्रधान ‘‘फरार’’ थे और उन्हें काफी समय से लंबित चार गैर-जमानती वारंट के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया है।

राज्य पुलिस ने एक बयान में कहा, ‘‘गिरफ्तार व्यक्ति के खिलाफ दर्ज मामलों में हत्या, हत्या की कोशिश, हत्या के इरादे से अपहरण, सबूत मिटाना, घर में जबरन घुसना और घातक हथियारों का इस्तेमाल कर दंगा करने जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। कुछ मामलों में शस्त्र अधिनियम के प्रावधान भी लगाए गए हैं।’’

पुलिस ने कहा, ‘‘प्रधान 2007 से फरार थे और इन मामलों में उन्हें फरार घोषित करते हुए आरोप-पत्र दायर किया गया था। वारंट तामील करने के संबंध में पूर्व में बार-बार किए गए प्रयास विफल रहने और समय-समय पर अदालतों में वारंट तामील नहीं होने की रिपोर्ट दी जाती रही है।’’

पुलिस ने बताया कि यह गिरफ्तारी काफी समय से लंबित गैर-जमानती वारंट को तामील कराने के लिए चलाए गए एक विशेष अभियान के दौरान की गई।

पुलिस के अनुसार, ‘‘चुनाव और उपचुनाव के दौरान भारत निर्वाचन आयोग की ओर से इस तरह की कार्रवाई के लिए स्थायी निर्देश जारी होते हैं। एक विशेष अभियान के तहत इन निर्देशों का पालन करते हुए प्रधान की गिरफ्तारी होना एक कानूनी कार्रवाई है।’’

प्रधान को उस समय गिरफ्तार किया गया, जब पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने छह अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस को अपनी पार्टी का समर्थन देने की घोषणा की थी, क्योंकि उनके उम्मीदवार ने चुनाव से अपना नाम वापस ले लिया था।

प्रधान की गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष शुभांकर सरकार ने कहा कि पार्टी को इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि उन्हें क्यों गिरफ्तार किया गया और उन्हें कहां रखा गया है।

सरकार ने शुक्रवार शाम कहा, ‘‘हमें पता चला कि उन्हें हत्या के एक मामले में हिरासत में लिया गया है, लेकिन हमें इसके बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। मिलन (प्रधान) उन नेताओं में शामिल थे, जो नंदीग्राम आंदोलन में सबसे आगे थे और उनपर कई मामले दर्ज किए गए थे। लेकिन, आज उन्हें क्यों गिरफ्तार किया गया?’’

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि जब पार्टी ने निर्वाचन आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी से संपर्क किया तो वह भी प्रधान की गिरफ्तारी के बारे में कोई जानकारी नहीं दे सके।

सरकार ने कहा, ‘‘पुलिस ने प्रधान की गिरफ्तारी की कोई वजह नहीं बताई है। यह बेहद हैरानी की बात है। जब आचार संहिता लागू हो और उस खास सीट (नंदीग्राम) का प्रशासन निर्वाचन आयोग के अधीन हो तो पुलिस किसी उम्मीदवार को कैसे गिरफ्तार कर सकती है?’’

सरकार ने शुभेंदु अधिकारी पर भी निशाना साधा और कहा कि प्रधान को इसलिए गिरफ्तार करवाया गया, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को ‘‘चुनाव हारने का डर था’’।

सरकार ने कहा, ‘‘प्रधान नंदीग्राम में एक लोकप्रिय उम्मीदवार हैं और भाजपा को चुनाव हारने का डर है। यही वजह है कि उन्हें गिरफ्तार किया गया। अगर पुलिस को उनसे पूछताछ करनी थी तो वह उन्हें बुला सकती थी।’’

कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि यह हैरानी की बात है कि विधानसभा चुनाव में इतने बड़े जनादेश के साथ जीतने के बाद भी ‘‘भाजपा उपचुनाव जीतने के लिए निर्वाचन आयोग का इस्तेमाल कर रही है’’।

उन्होंने कहा, ‘‘इससे पता चलता है कि इतने कम समय में भाजपा ने अपनी प्रासंगिकता कितनी खो दी है।’’

भाषा सुरभि सुरेश

सुरेश