नयी दिल्ली, 19 सितंबर (भाषा) भारत और अमेरिका के व्यापार संबंधों में अप्रैल 2025 से भू-राजनीतिक घटनाक्रमों में उतार-चढ़ाव के बीच शुल्क को लेकर कई घटनाक्रम देखने को मिले हैं।
ताजा घटनाक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐसे कानून पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका उद्देश्य रूस और उसके प्रमुख ऊर्जा खरीदारों जैसे चीन और भारत पर भारी शुल्क लगाना है।
दोनों देशों के बीच शुल्क से जुड़े प्रमुख घटनाक्रम और शुल्क की बड़ी घोषणाओं का क्रम इस प्रकार है।
दो अप्रैल 2025 को ट्रंप ने इस दिन को ‘मुक्ति दिवस’ बताते हुए कई देशों से आयात पर व्यापक शुल्क की घोषणा की थी। भारत के मामले में यह 26 प्रतिशत था, जिसमें 10 प्रतिशत मूल शुल्क और 16 प्रतिशत जवाबी शुल्क शामिल था। इससे पहले भारत से आने वाले सामान पर केवल सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र (एमएफएन) शुल्क लागू था। यह विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के सदस्य देशों से आयातित सामान पर लगाया जाने वाला सामान्य शुल्क है।
नौ अप्रैल 2025 को अमेरिका ने भारतीय सामान पर 16 प्रतिशत जबावी शुल्क को 90 दिनों के लिए, यानी नौ जुलाई 2025 तक, स्थगित कर दिया। हालांकि, 10 प्रतिशत का मूल शुल्क जारी रहा।
इसके बाद 31 जुलाई 2025 को अमेरिका ने भारत से आने वाले सामान पर सात अगस्त से प्रभावी 25 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा की। दो अप्रैल से छह अगस्त 2025 तक भारतीय सामान पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क ही लागू था। छह अगस्त को रूस से तेल खरीद जारी रखने के लिए भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क की घोषणा की गई। इसके बाद कुछ सीमित छूट वाली वस्तुओं को छोड़कर भारतीय सामान पर कुल अतिरिक्त शुल्क बढ़कर 50 प्रतिशत हो गया।
अमेरिकी बाजार में 27 अगस्त 2025 को भारतीय सामान पर 50 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लागू था, जिसमें 25 प्रतिशत जबावी शुल्क और रूस से तेल खरीदने के लिए लगाया गया 25 प्रतिशत शुल्क शामिल था।
दो फरवरी 2026 को भारत और अमेरिका एक व्यापार समझौते पर सहमत हुए, जिसके तहत अमेरिका भारतीय सामान पर जबावी शुल्क को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने वाला था। हालांकि, 18 प्रतिशत शुल्क कभी लागू नहीं हुआ।
छह फरवरी को दोनों देशों ने एक संयुक्त बयान जारी कर द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण के लिए एक रूपरेखा पर सहमति की घोषणा की। अगले दिन, सात फरवरी को अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने के लिए भारतीय सामान पर लगाया गया अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क हटा दिया।
अमेरिकी उच्चतम न्यायालय ने 20 फरवरी को जबावी शुल्क प्रणाली को रद्द कर दिया। इसके बाद भारतीय सामान पर फिर केवल एमएफएन शुल्क लागू रह गया। 24 फरवरी को अमेरिका ने 10 प्रतिशत का नया वैश्विक शुल्क लागू किया, जिसमें भारत भी शामिल था। इसके तहत भारत पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क और एमएफएन शुल्क लागू था। यह व्यवस्था 150 दिनों के लिए थी।
वैश्विक शुल्क की अवधि 24 जुलाई 2026 को समाप्त हो गई। इसके साथ ही अमेरिका ने बंधुआ मजदूरी से जुड़ी चिंताओं का हवाला देते हुए भारत पर अमेरिकी व्यापार कानून की धारा 301 के तहत 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया।
इस तरह शुल्क का नाम और कानूनी आधार वैश्विक शुल्क से बदलकर भारत पर लक्षित शुल्क हो गया। अधिकांश प्रभावित भारतीय निर्यात पर प्रभावी दर एमएफएन शुल्क के अलावा 10 प्रतिशत बनी रही। अमेरिकी सरकार के अंतिम उपायों के अनुसार भारत को धारा 301 के तहत 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क वाले निम्नतर स्तर में रखा गया है।
ट्रंप ने 18 सितंबर 2026 को रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने संबंधी अधिनियम पर हस्ताक्षर कर इसे कानून का रूप दिया। यह कानून रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार देता है। भारत और चीन जैसे प्रमुख खरीदार इस प्रावधान के दायरे में आ सकते हैं। हालांकि, कानून के तहत ऐसा शुल्क लगाने के लिए आगे राष्ट्रपति की कार्रवाई जरूरी होगी।
मौजूदा स्थिति में भारतीय निर्यात पर धारा 301 के तहत 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लागू है, जबकि कुछ वस्तुओं को इससे छूट है। इसके अलावा कुछ क्षेत्रों पर अलग शुल्क भी लागू हैं। इस्पात और एल्युमीनियम पर 50 प्रतिशत तथा वाहन कलपुर्जों पर 25 प्रतिशत शुल्क है। स्मार्टफोन, दवाएं और ऊर्जा उत्पाद अतिरिक्त शुल्क से बाहर हैं।
उदाहरण के लिए, यदि भारत से अमेरिका भेजी जाने वाली किसी शर्ट पर पांच प्रतिशत एमएफएन शुल्क लागू है, तो मौजूदा व्यवस्था में उस पर पांच प्रतिशत एमएफएन शुल्क के अलावा 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगेगा।
भाषा योगेश पाण्डेय
पाण्डेय