श्रीनगर, 25 सितंबर (भाषा) जम्मू-कश्मीर विधानसभा में शुक्रवार को उस समय हंगामे की स्थिति पैदा हो गई जब कांग्रेस विधायकों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया।
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस सदस्य अपनी सीटों से खड़े हो गए और कुमार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।
कांग्रेस विधायक निजामुद्दीन भट, इरफान हाफिज लोन और इफ्तिखार अहमद ने सीईसी के खिलाफ नारे लगाए और ‘‘वोट बचाओ, लोकतंत्र बचाओ’’ तथा ‘‘निष्पक्ष चुनाव के बिना लोकतंत्र नहीं’’ लिखे बैनर प्रदर्शित किए।
लोन ने कहा, ‘‘यह लोकतंत्र पर हमला है।’’
भट ने विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर से कांग्रेस विधायकों को अपनी बात रखने देने का आग्रह किया। हालांकि, अध्यक्ष ने इसकी अनुमति नहीं दी और सदस्यों से अपनी सीटों पर बैठने को कहा।
कांग्रेस विधायकों ने प्रदर्शन जारी रखा और आसन के समक्ष पहुंचने की कोशिश की। इस पर अध्यक्ष ने उन्हें कार्रवाई की चेतावनी दी।
प्रदर्शन कर रहे सदस्यों ने कुमार के इस्तीफे और उनकी गिरफ्तारी की मांग भी की। हालांकि, अध्यक्ष ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग ‘‘हमारे नियंत्रण में नहीं है।’’
बाद में कांग्रेस विधायक अपनी सीटों पर लौट गए और प्रश्नकाल की कार्यवाही जारी रही।
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल एक अंग्रेजी दैनिक की खबर के बाद सीईसी के खिलाफ विरोध कर रहे हैं।
अग्रेजी दैनिक ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान कम से कम 14 बार रिकॉर्ड पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि कुछ फैसले और आदेश उनकी जानकारी के बिना जारी किए गए, जबकि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का राष्ट्रव्यापी कार्यान्वयन पूर्ण आयोग की निगरानी में था।
खबर के अनुसार, उनकी आपत्तियां वैधानिक मतदाता पंजीकरण फॉर्म-6 में किए गए बदलाव, मतदाता सूचियों में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया तथा मतदाता सूची के डेटाबेस पर केंद्रीकृत नियंत्रण सहित विभिन्न मुद्दों से संबंधित थीं।
एसआईआर प्रक्रिया को लेकर दो निर्वाचन आयुक्तों की ओर से उठाए गए सवालों के बीच निर्वाचन आयोग ने बुधवार को कहा था कि किसी भी संस्था में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां सामने आना सामान्य बात है।
आयोग ने कहा था कि उसके सभी आदेशों को पूरा कानूनी आधार प्राप्त है और वे स्थापित वैधानिक प्रक्रियाओं के अनुरूप हैं।
निर्वाचन आयोग ने एक बयान में यह भी कहा था कि केवल तीनों निर्वाचन आयुक्त ही नहीं, बल्कि आयोग का प्रत्येक अधिकारी चुनाव प्रणाली में सुधार के लिए अपने सुझाव देने के लिए पूरी तरह अधिकृत है।
भाषा मनीषा रंजन
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