कांग्रेस के लोग ‘आप’ जैसी एक और पार्टी बनने के डर से जंतर-मंतर नहीं गए : श्रीकांत शिंदे
कांग्रेस के लोग ‘आप’ जैसी एक और पार्टी बनने के डर से जंतर-मंतर नहीं गए : श्रीकांत शिंदे
नयी दिल्ली, 28 जुलाई (भाषा) शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने मंगलवार को लोकसभा में कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि इसके लोग 37 दिन तक जंतर-मंतर पर नहीं गए, क्योंकि उन्हें डर था कि कहीं आम आदमी पार्टी (आप) जैसी एक और दल न बन जाए।
‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ पर चर्चा में भाग लेते हुए शिंदे ने नीट प्रश्न पत्र लीक के विरोध में हाल में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन का हवाला दते हुए कहा, ‘‘यह जो विपक्ष है, वह आंदोलन में असमाजिक तत्व डाल कर कानून व्यवस्था की स्थिति पैदा करना चाहता था, और लोगों को भड़काया गया। इनकी पार्टियों के लोग गए और वहां भद्दी-भद्दी गालियां दी गईं।’’
शिवसेना सांसद प्रदर्शन के दौरान रील बनाने और अपशब्दों का इस्तेमाल किये जाने का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘प्रधानमंत्री को, उनकी (दिवंगत) मां को गाली दी गई, सेना, सीआरपीएफ और पुलिस को गाली दी गई। यदि तानाशाही होती तो गाली देने की हिम्मत कोई नहीं करता।’’
उन्होंने कहा, ‘‘आज यहां लोकतंत्र है इसलिए छात्रों को बुलाया, उनको सुना उनपर दर्ज मुकदमे वापस ले लिए।’’
शिंदे ने विपक्ष से सवाल करते हुए कहा कि सरकार ने तो बच्चों की बात सुनी, उनसे बात की…यहां सुधार लाने का काम किया, लेकिन इन्होंने क्या किया?
उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा, ‘‘उसके लोग 37 दिन तक जंतर-मंतर पर नहीं गए क्योंकि उन्हें डर था कि कहीं ‘आप’ जैसी पार्टी तो नहीं बन जाएगी।’’
शिंदे ने कहा कि इस सरकार में नैतिकता है, इसलिए तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने खुद इस्तीफा दिया। उन्होंने विपक्षी सदस्यों के शोरगुल के बीच कहा, ‘‘ आपकी वजह से नहीं दिया। पेपर लीक पर खुद जिम्मेदारी ली।’’
उन्होंने कहा कि सदन में बैठे सभी लोगों को सोचना जरूरी है कि युवाओं की क्या पीड़ा है? शिवसेना सांसद ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में बहुत सुधार की जरूरत है।
उन्होंने कहा, ‘‘नीट में एक दिन, एक मौका हम युवाओं को देते हैं। छात्रों की बरसों की तपस्या, उनके परिवारों की उम्मीदें और भविष्य सिर्फ तीन घंटे में और एक दिन में हम कैसे तय कर सकते हैं?’’
उन्होंने इस प्रणाली को बदलने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि अमेरिका सहित अन्य देशों की तर्ज पर साल में एक से अधिक बार इस परीक्षा का आयोजन किया जाए।
शिंदे ने कहा कि देश में कोचिंग कक्षाओं का एक बड़ा साम्राज्य खड़ा हो गया है, 50,000 करोड़ रूपये का उद्योग चल रहा है और 2030 तक यह एक लाख करोड़ रुपये का उद्योग बन जाएगा।
उन्होंने कहा, ‘‘सरकार को सोचना जरूरी है कि इन कोचिंग संस्थान को कैसे विनयमित किया जाए।’’
इससे पहले चर्चा में भाग लेते हुए, तेलुगु देशम पार्टी के लवू श्री कृष्ण देवरायलू ने भी कहा कि कोचिंग संस्थानों का पूरा बाजार 50 हजार करोड़ रुपये का है और अगले 6-7 साल में यह एक लाख करोड़ रुपये का होने जा रहा है।
उन्होंने एक निजी ‘एडुटेक’ कंपनी का जिक्र करते हुए कहा कि शिक्षा इस देश में लाभ के लिए नहीं होनी चाहिए।
तेदेपा सांसद ने नीट के लिए एक विकेंद्रिकृत प्रश्नपत्र निर्धारण पैनल का गठन करने और एक ‘राष्ट्रीय प्रश्नपत्र बैंक’ की स्थापना की भी मांग की।
भाषा सुभाष हक
हक

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