नयी दिल्ली/अलप्पुझा (केरल), पांच मई (भाषा) कांग्रेस के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने मंगलवार को कहा कि मुख्यमंत्री के चयन को लेकर कांग्रेस में एक स्थापित प्रक्रिया है और पार्टी केरल के संदर्भ में जल्द फैसला करेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि केरल की जनता ने संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के पक्ष में जनादेश देकर राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और कांग्रेस में विश्वास जताया है।
केरल में यूडीएफ की जीत के बाद पहली बार वेणुगोपाल जब दिल्ली पहुंचे तो हवाई अड्डे पर कांग्रेस के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया।
वेणुगोपाल ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘केरल के लोगों ने कांग्रेस पार्टी और यूडीएफ गठबंधन पर अपना विश्वास जताया है। उन्हें राहुल गांधी और खरगे जी के नेतृत्व पर भरोसा है।’’
उनका कहना था, ‘‘एलडीएफ सरकार ने लोगों के लिए कई परेशानियां पैदा की थीं। लोग एलडीएफ सरकार से परेशान हो चुके थे, इसलिए लोगों ने शासन के लिए यूडीएफ को चुना है।’’
इससे पहले, उन्होंने केरल के अलप्पुझा में संवाददाताओं से कहा कि केरल विधानसभा चुनाव के नतीजे राज्य में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिश कर रहीं ताकतों के लिए करारा जवाब हैं और यह दिखाते हैं कि जनता ने वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के पिछले एक दशक के ‘राजनीतिक अहंकार और कुशासन’ को भी नकार दिया है।
मुख्यमंत्री पद के बारे में पूछे जाने पर वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस के पास इसके लिए एक स्थापित आंतरिक प्रक्रिया है और जल्द ही फैसला कर लिया जाएगा।
उनका आशय कांग्रेस की उस प्रक्रिया की तरफ था, जिसके तहत पार्टी विधायक दल की बैठक में आमतौर पर एक लाइन का प्रस्ताव पारित कर नेता को चुनने के लिए पार्टी आलाकमान को अधिकृत किया जाता है।
वेणुगोपाल ने पश्चिम बंगाल और असम में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत को भी असली जनादेश मानने से इनकार कर दिया और आरोप लगाया कि ये जीत अनुचित तरीकों से हासिल की गईं जिससे वहां किसी भी विपक्षी दल का जीतना लगभग नामुमकिन हो गया।
उन्होंने दावा किया कि भाजपा पूरे देश में यही करना चाहती है और इसीलिए वह परिसीमन विधेयक लेकर आई, जिसे विपक्ष ने एकजुट होकर नकार दिया।
निर्वाचन आयोग के अनुसार, विधानसभा की 140 सीट में से यूडीएफ ने 102 जीती हैं, जबकि मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नीत एलडीएफ को महज 35 सीट पर संतोष करना पड़ा।
भाषा हक
हक नरेश
नरेश