कांग्रेस ने जम्मू कश्मीर में प्रदर्शन किया, प्रधानमंत्री मोदी के इस्तीफे की मांग की

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कांग्रेस ने जम्मू कश्मीर में प्रदर्शन किया, प्रधानमंत्री मोदी के इस्तीफे की मांग की

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  • Publish Date - March 9, 2026 / 04:27 PM IST,
    Updated On - March 9, 2026 / 04:27 PM IST

जम्मू, नौ मार्च (भाषा) कांग्रेस की जम्मू कश्मीर इकाई ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस्तीफे की मांग की।

पार्टी ने जम्मू कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की भी मांग की।

श्रीनगर में कांग्रेस के सैकड़ों कार्यकर्ता और नेता एम ए रोड स्थित जम्मू कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यालय में एकत्र हुए और मोदी सरकार के खिलाफ नारे लगाए।

बांदीपोरा के विधायक निजामुद्दीन भट के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने पार्टी कार्यालय से एमए रोड तक मार्च निकालने और बाहर विरोध प्रदर्शन करने की योजना बनाई थी। हालांकि, पुलिस बल ने प्रदर्शनकारियों को रोक दिया और पार्टी कार्यालय का गेट सील कर दिया, जिससे प्रदर्शनकारी बाहर नहीं निकल सके।

पत्रकारों से भट्ट ने कहा कि सरकार ने देश की छवि और उसकी संप्रभुता से समझौता किया है।

उन्होंने कहा, ‘व्यापार समझौते का सीधा परिणाम यह है कि पहली बार भारत की संप्रभुता और छवि से समझौता हुआ है। इसके दूरगामी परिणाम होंगे।’

भट ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के आर्थिक परिणाम होंगे।

उन्होंने कहा, ‘देश की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है, हम मंदी के दौर से गुजर रहे हैं। इस समझौते (प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौता) से हम आम व्यक्ति को नहीं, बल्कि देश की आर्थिक नींव को प्रभावित कर रहे हैं।’

भट ने कहा कि सरकार को संविधान, देश की संप्रभुता, अन्य देशों के साथ नीतियों और संबंधों, गरीबों और जम्मू कश्मीर की पहचान की कोई परवाह नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘हमने अपनी अखंडता, देश की सुरक्षा और एक शक्तिशाली प्रतिस्पर्धी देश के रूप में अपनी छवि से समझौता किया है। संक्षेप में कहें तो यह नीति एक घृणित रवैया है जो इस देश के हित में नहीं है।’

भट ने यह भी कहा कि देश को ईरान के समर्थन में और अमेरिका और इजरायल की ‘बर्बरता’ के खिलाफ खड़ा होना चाहिए था।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने जम्मू कश्मीर को जल्द से जल्द राज्य का दर्जा देने की भी मांग की।

कांग्रेस के कई कार्यकर्ता और नेता रेजिडेंसी रोड स्थित शहीदी चौक पर पार्टी मुख्यालय के बाहर एकत्र हुये, लेकिन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी संख्या में तैनात पुलिस ने उन्हें आगे नहीं बढ़ने दिया।

पार्टी कार्यकर्ता ‘राज्य का दर्जा बहाल करो’ और ‘हमारी रियासत हमारा हक’ लिखे हुए पोस्टर लिए हुए थे और मोदी सरकार तथा प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ नारे लगा रहे थे। इस प्रदर्शन में बडी संख्या में महिला कार्यकर्ता भी मौजूद थीं।

केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कर्रा ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने ‘भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा को नष्ट कर दिया है’ और उन संस्थानों को कमजोर कर दिया है जो कभी देश की विदेश नीति को परिभाषित करते थे।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘भारत गुटनिरपेक्ष आंदोलन और दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) जैसे क्षेत्रीय सहयोग मंचों का समर्थक रहा है, लेकिन आज देश की छवि धूमिल हो गई है। प्रधानमंत्री के आचरण ने पद की गरिमा और सम्मान को ठेस पहुंचाई है।’

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार वैश्विक शक्तियों के साथ अपने व्यवहार में भारत के हितों से समझौता कर रही है।

उन्होंने कहा, ‘वह (अमेरिका) तो इस बात पर भी शर्तें थोप रहे हैं कि भारत को रूस से तेल खरीदना चाहिए या नहीं। हमारे व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े ऐसे फैसले दूसरे देशों द्वारा तय नहीं किए जा सकते।’

कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री पर अंतरराष्ट्रीय मामलों में ‘पूरी तरह से आत्मसमर्पण’ करने का आरोप लगाया और पार्टी की इस मांग को दोहराया कि मोदी इस्तीफा दें।

विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने विरोध के प्रतीक के रूप में अमेरिका और इजराइल के झंडे भी जलाए।

कर्रा ने कहा कि पार्टी ने संसद के बजट सत्र के साथ-साथ जम्मू कश्मीर के सभी 20 जिलों में विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई थी, लेकिन आरोप लगाया कि पुलिस ने कश्मीर घाटी के कुछ जिलों में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों की अनुमति नहीं दी।

उन्होंने दावा किया कि घाटी के कई जिलों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को या तो हिरासत में लिया गया या घर में नजरबंद कर दिया गया। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया।

कर्रा ने जम्मू कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की पार्टी की मांग को दोहराया।

उन्होंने कहा, ‘राज्य का दर्जा बहाल करना हमारा घोषित रुख है और हम इसे दोहरा रहे हैं। हम किसी से भीख नहीं मांग रहे हैं और न ही किसी से कोई एहसान की उम्मीद कर रहे हैं। हमारे संवैधानिक अधिकार हमें वापस मिलने चाहिए।’

उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य का दर्जा बहाल होने तक पार्टी अपना संघर्ष जारी रखेगी। भाषा

शुभम नरेश

नरेश