कांग्रेस वंदे मातरम् का वही संस्करण गाती है, जो महात्मा गांधी और पटेल ने तय किया था : खरगे

कांग्रेस वंदे मातरम् का वही संस्करण गाती है, जो महात्मा गांधी और पटेल ने तय किया था : खरगे

कांग्रेस वंदे मातरम् का वही संस्करण गाती है, जो महात्मा गांधी और पटेल ने तय किया था : खरगे
Modified Date: August 22, 2026 / 06:59 pm IST
Published Date: August 22, 2026 6:59 pm IST

कलबुर्गी (कर्नाटक), 22 अगस्त (भाषा) कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शनिवार को केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार और भाजपा पर ‘ध्रुवीकरण की राजनीति’ करने का आरोप लगाया और कहा कि कांग्रेस वंदे मातरम् का वही संस्करण गाती है, जो महात्मा गांधी तथा सरदार वल्लभभाई पटेल समेत राष्ट्रीय नेताओं ने तय किया था।

उन्होंने सवाल किया कि क्या वंदे मातरम् के छोटे संस्करण को तय करने वाले राष्ट्रीय नेता भी ‘राष्ट्रविरोधी’ थे।

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष खरगे ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की एक टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने बृहस्पतिवार को कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा था कि वंदे मातरम् के केवल दो अंतरे गाने का उसका फैसला ‘राष्ट्रविरोधी’ है और ऐसा कानून की अनदेखी करते हुए अपने वोट बैंक को खुश करने के लिए किया गया है।

खरगे ने कहा, ‘अगर आप इतिहास पढ़ेंगे, तो आपको पता चलेगा। पंडित नेहरू, महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस और वल्लभभाई पटेल ने मिलकर वंदे मातरम् के अंतरों की संख्या छह से घटाकर दो करने का फैसला किया था और कहा था कि यह देश के लिए बेहतर है। 1937 तक हमें आजादी नहीं मिली थी। उन सभी ने मिलकर यह फैसला किया और हम सभी 90 वर्ष से यही संस्करण गाते रहे हैं।’

उन्होंने यहां पत्रकारों से बातचीत के दौरान सवाल किया कि जब 90 वर्ष से कोई समस्या नहीं थी, तो अब यह मुद्दा क्यों उठाया जा रहा है।

उन्होंने कहा, ‘आप (मोदी) गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब आपने इसे क्यों नहीं गाया? अब आपको प्रधानमंत्री बने 11-12 साल हो गए हैं, तो आपने अब तक इस मुद्दे पर कुछ क्यों नहीं किया था? कई राज्यों में आपकी भाजपा की सरकारें हैं और आपके मुख्यमंत्री हैं, तो आपने वहां ऐसा क्यों नहीं किया? जब भी आपका मन होता है, आप नए मुद्दे ले आते हैं।’

उन्होंने कहा, ‘आप (मोदी/भाजपा) ने भी वर्षों तक इसे नहीं गाया, तो क्या आप भी देशद्रोही हैं? वे देश में ध्रुवीकरण की राजनीति कर रहे हैं। यह अच्छा नहीं है, देश के लिए अच्छा नहीं है। हम रहें या न रहें, यह देश स्थायी है। इस देश, संविधान और लोकतंत्र की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है।”

भाषा जोहेब दिलीप

दिलीप


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