राजस्थान के स्कूलों को राजनीतिक टकराव का मैदान नहीं बनने दिया जाएगा: शिक्षक संगठन

राजस्थान के स्कूलों को राजनीतिक टकराव का मैदान नहीं बनने दिया जाएगा: शिक्षक संगठन

राजस्थान के स्कूलों को राजनीतिक टकराव का मैदान नहीं बनने दिया जाएगा: शिक्षक संगठन
Modified Date: August 22, 2026 / 08:52 pm IST
Published Date: August 22, 2026 8:52 pm IST

कोटा (राजस्थान), 22 अगस्त (भाषा) जयपुर के एक सरकारी स्कूल का निरीक्षण करने गई ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (कॉजपा) की टीम को स्थानीय लोगों द्वारा खदेड़े जाने के एक दिन बाद एक शिक्षक संगठन ने शनिवार को कहा कि राजस्थान के शैक्षणिक संस्थानों को ‘राजनीतिक टकराव का मैदान’ नहीं बनने दिया जाएगा।

कॉजपा ने आरोप लगाया था कि स्कूल भैंसों के तबेले में संचालित किया जा रहा है।

हालांकि, अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (एबीआरएसएम) ने कहा कि वह सरकार का बचाव नहीं कर रहा है, बल्कि ‘‘राजनीतिक फायदे के लिए स्कूल परिसर को सियासी मुद्दा बनाने’’ के खिलाफ आवाज उठा रहा है।

जयपुर की घटना के बाद राजनीतिक दखल के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए शिक्षक महासंघ ने कहा कि कोई भी व्यक्ति स्कूल प्रमुख से औपचारिक अनुमति लेने के बाद ही स्कूल जा सकता है।

संगठन ने कहा कि प्रशासनिक आदेशों का राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल करना या शिक्षकों पर दबाव डालना स्वीकार नहीं किया जाएगा।

जब कॉजपा की टीम शुक्रवार को स्कूल की स्थिति का निरीक्षण करने के लिए रामपुरा कंवरपुरा गांव पहुंची, तो वहां स्थानीय निवासियों के साथ टीम का विवाद हो गया। कॉजपा ने स्थानीय निवासियों पर ‘भाजपा के गुंडे’ होने का आरोप लगाया।

एक दिन बाद कॉजपा और ग्रामीणों ने एक-दूसरे के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर मारपीट और हंगामा करने का आरोप लगाया।

एबीआरएसएम के प्रदेश उपाध्यक्ष पुरणमल नागर ने यहां संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि ‘बाहरी राजनीतिक कार्यकर्ताओं’ द्वारा निरीक्षण किए जाने की कोशिश के कारण स्थानीय ग्रामीणों ने कड़ा विरोध किया, जिसकी वजह से कहासुनी हुई और फिर हाथापाई हो गई।

संवाददाता सम्मेलन के दौरान एबीआरएसएम के राज्य मीडिया प्रकोष्ठ के सुरेश कुमार बैरागी ने कहा, ‘‘एबीआरएसएम सरकार या मंत्री का बचाव करने के लिए नहीं है, बल्कि राजनीतिक फायदे की नीयत से स्कूल परिसर को सियासी मुद्दा बनाने के खिलाफ आवाज उठाने के लिए है।’’

उन्होंने कहा कि स्कूल परिसर में बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगाने वाला हालिया आदेश मीडिया पर भी लागू होता है।

भाषा जोहेब सुरेश

सुरेश


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