उत्तराखंड में एसआईआर में ‘गड़बड़ियों’ के खिलाफ ईसी के बाहर कांग्रेस का धरना, ज्ञापन सौंपा
उत्तराखंड में एसआईआर में ‘गड़बड़ियों’ के खिलाफ ईसी के बाहर कांग्रेस का धरना, ज्ञापन सौंपा
नयी दिल्ली, 20 अगस्त (भाषा) कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ बृहस्पतिवार को निर्वाचन आयोग के कार्यालय के बाहर धरना दिया और बाद में आयोग के अधिकारियों को अपना ज्ञापन सौंपा।
कांग्रेस महासचिव और उत्तराखंड प्रभारी कुमारी सैलजा, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल, कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा, विधायक दल के नेता यशपाल आर्य और राज्य से जुड़े वरिष्ठ नेता हरक सिंह रावत, प्रीतम सिंह और गुरदीप सप्पल निर्वाचन आयोग के कार्यालय पहुंचे थे।
उनका आरोप था कि कई दिनों तक मिलने का समय मांगने के बाद जब कोई जवाब नहीं मिला तब उन्हें आयोग के कार्यालय पहुंच कर वहां धरने पर बैठना पड़ा।
सैलजा ने कहा, ‘‘लोकतंत्र में विपक्ष अपनी बात रखे, सवाल पूछे और संवैधानिक संस्था से जवाब मांगे, यही तो व्यवस्था की बुनियाद है।’’
उनके मुताबिक, पहले कांग्रेस नेताओं को निर्वाचन आयोग के अधिकारियों के साथ बैठक कर अपनी बात रखने का अवसर मिलता था, लेकिन बृहस्पतिवार को आयोग के कार्यालय के बाहर नेताओं को बैरिकेड के पास रोक दिया गया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं ने आयोग से कम से कम गेट खोलकर ज्ञापन स्वीकार करने का अनुरोध किया, लेकिन उन्हें बाहर ही रोका गया और बाद में गेट के बाहर से ही ज्ञापन देने को कहा गया।
कांग्रेस महासचिव ने सवाल किया, ‘‘क्या अब देश में जनता के अधिकारों से जुड़े सवालों पर भी सलाखों के बीच से बात होगी?’’
उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता पिछले कई दिनों से निर्वाचन आयोग से मिलने का समय मांग रहे थे और बृहस्पतिवार को बड़ी मुश्किल से दो अधिकारी बाहर आए तथा ज्ञापन स्वीकार किया।
उनका कहना था कि मतदाता सूचियों से नाम हटाए जाने, वोट काटे जाने और शिकायतकर्ताओं की पहचान तथा शिकायतों के आधार को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े इन गंभीर सवालों पर निर्वाचन आयोग का दरवाजे बंद कर लेना और विपक्ष की बात सुनने से बचना ‘‘बेहद चिंताजनक’’ है।
कांग्रेस नेताओं ने एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते हुए निर्वाचन आयोग से मतदाता सूची में नाम हटाए जाने के आधार और शिकायतों की प्रक्रिया से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की।
भाषा हक हक नरेश
नरेश

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