कांग्रेस मनरेगा को निरस्त किये जाने का मुद्दा संसद के आगामी सत्र में उठाएगी: खरगे

कांग्रेस मनरेगा को निरस्त किये जाने का मुद्दा संसद के आगामी सत्र में उठाएगी: खरगे

कांग्रेस मनरेगा को निरस्त किये जाने का मुद्दा संसद के आगामी सत्र में उठाएगी: खरगे
Modified Date: January 19, 2026 / 09:00 pm IST
Published Date: January 19, 2026 9:00 pm IST

बेंगलुरु, 19 जनवरी (भाषा) कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार को कहा कि पार्टी मनरेगा को निरस्त किये जाने का मुद्दा संसद के आगामी सत्र के दौरान भी उठाएगी।

पार्टी ने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) शासन के दौरान लागू किये गए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को निरस्त कर उसके स्थान पर एक नया कानून लाने के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू किया गया है।

हालांकि, उन्होंने कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार के बीच चल रहे संघर्ष और इस संबंध में कांग्रेस आला कमान के हस्तक्षेप पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

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खरगे ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘संसद के आगामी सत्र में भी हम इस मुद्दे को उठाएंगे। मनरेगा को निरस्त करने के खिलाफ हर जिले में हर जगह लड़ाई जारी है। कर्नाटक में भी विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई जा रही है। इस मुद्दे पर लड़ाई एक निरंतर कार्यक्रम है।’’

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि मनरेगा को निरस्त करने के विरोध में 22 जनवरी को सुबह 10 बजे दिल्ली के नेहरू सभागार में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया है।

उन्होंने कहा कि वह पार्टी नेता राहुल गांधी के साथ मिलकर इसका उद्घाटन करेंगे और कई गैर-सरकारी संगठन इसमें भाग ले रहे हैं।

उन्होंने कहा कि (नरेन्द्र) मोदी सरकार ने रोजगार गारंटी कार्यक्रम की जड़ पर प्रहार करके गरीबों को गहरा सदमा पहुंचाया है। उन्होंने कहा, ‘‘मनरेगा ने काम के अधिकार को सुनिश्चित किया था, जिसे केंद्र सरकार ने छीन लिया है।’’

संसद का बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू होने वाला है। यह दो चरणों में होगा और दो अप्रैल को समाप्त होगा।

कांग्रेस महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम की जगह लाई गई नयी योजना विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम जी) अधिनियम को रद्द कर मनरेगा को बहाल करने की मांग कर रही है।

खरगे ने केंद्र की भाजपा सरकार पर आरोप लगाया, ‘‘मनरेगा को निरस्त कर वे गरीबों को बंधुआ मजदूर बनाना चाहते हैं। वे चाहते हैं कि वे गुलामों की तरह जीवन व्यतीत करें।’’

भाषा

सुभाष माधव

माधव


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