जयपुर, 13 मार्च (भाषा) राजस्थान में विपक्षी दल कांग्रेस ने रसोई गैस (एलपीजी) सिलेंडरों की कथित कमी को लेकर शुक्रवार को कई शहरों में प्रदर्शन किया। पार्टी ने सरकार पर सिलेंडरों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए कहा कि जनता परेशान हो रही है।
पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं ने चूल्हे पर खाना बनाकर इस संकट पर प्रतीकात्मक विरोध जताया। अजमेर, जैसलमेर, नागौर, अलवर समेत कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए।
जयपुर में विरोध प्रदर्शन के दौरान पूर्व मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास ने भाजपा सरकार की आलोचना की और आरोप लगाया कि रसोई गैस सिलेंडरों की कमी और बढ़ती कीमतों के कारण लोग खाना नहीं बना पा रहे हैं।
कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार इस मुद्दे को हल करने और जल्द ही सामान्य गैस आपूर्ति बहाल करने में विफल रहती है तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
अजमेर में शहर और जिला कांग्रेस इकाइयों के कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन किया। उन्होंने सरकार के खिलाफ नारे लगाए और रसोई गैस सिलेंडर नहीं मिलने की दिक्कतों का प्रदर्शन किया।
पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं ने प्रतीकात्मक रूप से अपना विरोध दर्ज कराने के लिए कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर चूल्हा जलाकर खाना पकाया। उनका आरोप है कि एलपीजी सिलेंडर नहीं मिलने के कारण आम लोग एक बार फिर चूल्हे के इस्तेमाल जैसे पुराने तरीके अपनाने को मजबूर हैं।
यहां राजकुमार सहित अन्य कांग्रेस नेताओं ने खाली सिलेंडर लेकर ज्योतिबा फुले सर्किल से कलेक्ट्रेट तक मार्च किया। पूर्व मंत्री रघु शर्मा ने भी इस विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया।
जैसलमेर में कांग्रेस के जिला अध्यक्ष अमरदीन फकीर और पूर्व मंत्री सालेह मोहम्मद के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी अपने साथ खाली सिलेंडर, जलाऊ लकड़ी, चूल्हे और बर्तन लेकर आए थे। इन्होंने प्रदर्शन करते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
उन्होंने विरोध प्रदर्शन के हिस्से के तौर पर सड़क पर चूल्हा जलाकर चाय भी बनाई।
पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने नागौर, अलवर और अन्य जगहों पर भी विरोध प्रदर्शन किए। नागौर में कांग्रेस अध्यक्ष हनुमान बांगड़ा ने आरोप लगाया कि एलपीजी सिलेंडरों की कमी के कारण आम लोग और छोटे कारोबारी परेशान हैं।
इस बीच जयपुर में लोगों एलपीजी सिलेंडर मिलने में देरी की शिकायतें की हैं। अनेक लोग सिलेंडर बुकिंग की स्थिति जानने के लिए गैस एजेंसियों पर पहुंचें और कुछ एजेंसियों पर लंबी कतारें भी देखने को मिलीं।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने दावा किया कि एलपीजी सिलेंडर आपूर्ति की स्थिति बिगड़ने की रिपोर्टों के बावजूद सरकार इस स्थिति को स्वीकार करने से इनकार कर रही है।
उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘राजस्थान के मुख्यमत्री भजनलाल शर्मा जी एक दिन पहले ही बैठक कर दावा कर रहे थे कि राजस्थान में एलपीजी गैस का कोई संकट नहीं है। आज भाजपा प्रदेशाध्यक्ष एवं पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने इसी तरह के बयान दिए हैं। रोज बिगड़ती स्थिति के बावजूद मुख्यमंत्री एवं भाजपा नेता ऐसे दावे कैसे कर सकते हैं? क्या उनका धरातल से संपर्क बिल्कुल ही टूट चुका और वे केवल अधिकारियों की ओर से दी गई जानकारी पर निर्भर हैं?’
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा,’पूरे प्रदेश में एलपीजी गैस के लिए आम लोग सड़कों पर त्राहिमाम कर रहे हैं, लंबी कतारों में खड़े हैं, कालाबाजारी हो रही है, व्यवसाय बंद हो रहे हैं, लोग परेशान हैं, लेकिन फिर भी ‘पर्ची सरकार’ है कि मानने को तैयार नहीं है।’
इस बीच वाणिज्यिक रसोई गैस सिलेंडरों की कमी के कारण कई ढाबों, रेस्टोरेंट ने अपनी व्यंजन सूची को छोटा किया है और दाम बढ़ा दिए हैं।
यहां गोपालपुरा बाईपास पर एक ढाबा मालिक प्रकाश कुमार ने कहा,’मौजूदा हालात से निपटने के लिए मेरे पास व्यंडन कम करने और दाम बढ़ाने के अलावा कोई चारा नहीं था। बाजार में रसोई गैस का कमर्शियल सिलेंडर मिल नहीं रहा। अगर मिलता भी है तो उसके बहुत ज्यादा पैसे मांग रहे हैं।’
रसोई गैस की कमी के कारण होटलों के अलावा टिफिन सेंटरों और पीजी हॉस्टलों में भी हालात खराब हो रहे हैं। महेश नगर में एक पीजी चलाने वाले गिरधारी शर्मा ने कहा, “रसोई गैस की कमी से हालात मुश्किल हो गए हैं। कैंटीन में इनका उपयोग सीमित किया गया है और दूसरे विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।’
महेश नगर इलाके में रहने वाले एक छात्र ने कहा कि चाय और खाने की कीमतें बढ़ गई हैं जिससे उनका महीने का बजट बिगड़ गया है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे राहुल चौधरी ने कहा, “चाय और खाने-पीने की दूसरी चीजों के दाम बढ़ गए हैं। हो सकता है कि ये और बढ़ें। कीमतें बढ़ने के साथ ही पोहा जैसी खाने की चीजें बेचने वाले कई दिनों से नहीं आ रहे हैं। अभी तो हालात ठीक-ठाक हैं लेकिन अगर ऐसा ही चला तो हालात और बिगड़ेंगे और मेरा महीने का बजट पूरी तरह से बिगड़ जाएगा।”
भाषा पृथ्वी
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