कांग्रेस कार्य समिति की शुक्रवार को बैठक, महिला आरक्षण और पश्चिम एशिया पर चर्चा

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कांग्रेस कार्य समिति की शुक्रवार को बैठक, महिला आरक्षण और पश्चिम एशिया पर चर्चा

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  • Publish Date - April 9, 2026 / 05:16 PM IST,
    Updated On - April 9, 2026 / 05:16 PM IST

नयी दिल्ली, नौ अप्रैल (भाषा) कांग्रेस शुक्रवार को अपनी कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक करेगी, जिसमें पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा महिला आरक्षण कानून में संशोधन करने के सरकार के कदम, प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया और पश्चिम एशिया संघर्ष पर विचार-विमर्श किए जाने की संभावना है।

कांग्रेस की यह प्रमुख बैठक संसद के वर्तमान बजट सत्र के तहत अगले सप्ताह होने वाली दोनों सदनों की तीन दिवसीय बैठक से कुछ दिन पहले हो रही है। संसद की तीन दिवसीय बैठक 16,17 और 18 अप्रैल को होगी।

सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिला आरक्षण अधिनियम को लागू करने और लोकसभा सीटों की संख्या 543से बढ़ाकर 816 करने के लिए विधेयक लाने वाली है, जिसमें करीब 270 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को उन मसौदा विधेयकों को मंजूरी दी, जिनका उद्देश्य 2029 के संसदीय चुनाव से पहले महिला आरक्षण अधिनियम को लागू करना और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाना है।

सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक शुक्रवार को अपराह्न तीन बजे पार्टी के स्थानीय मुख्यालय ‘इंदिरा भवन’ में होगी।

उन्होंने कहा कि पार्टी के शीर्ष नेता महिला आरक्षण कानून में संशोधन करने के सरकार के कदम, प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया और पश्चिम एशिया संघर्ष के मुद्दे सहित अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे।

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर आरोप लगाया है कि वह महिलाओं के लिए आरक्षण कानून में संशोधन और उसके शीघ्र कार्यान्वयन के प्रस्ताव का इस्तेमाल एक चुनावी मुद्दे के तौर पर कर रहे हैं।

कांग्रेस ने पिछले सप्ताह यह आरोप भी लगाया था कि सरकार ने पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के नतीजों को प्रभावित करने तथा चुनावी लाभ हासिल करने के लिए इस महीने संसद का ‘‘विशेष सत्र’’ बुलाया है, जो चुनाव आचार संहिता का घोर उल्लंघन है।

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने इस बात पर जोर दिया था कि परिसीमन की प्रक्रिया में जल्दबाजी के ‘‘खतरनाक’’ नतीजे होंगे तथा ‘‘हम राज्य स्तर पर लोकसभा सीटों की संख्या के तुलनात्मक अंतर में बदलाव नहीं चाहते।’’

भाषा हक

हक पवनेश

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