श्मशान घाट विवाद में मध्यस्थता के विकल्पों पर विचार करें: न्यायालय ने ईशा फाउंडेशन को निर्देश दिया
श्मशान घाट विवाद में मध्यस्थता के विकल्पों पर विचार करें: न्यायालय ने ईशा फाउंडेशन को निर्देश दिया
नयी दिल्ली, 26 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को सद्गुरु जग्गी वासुदेव के ईशा फाउंडेशन से तमिलनाडु के कोयंबटूर के बाहरी इलाके में स्थापित श्मशान घाट से संबंधित भूमि विवाद को सौहार्दपूर्ण ढंग से निपटाने की संभावना तलाशने को कहा।
प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने कोयंबटूर के एक निवासी द्वारा दायर याचिका पर यह आदेश पारित किया, जिसमें उसने फाउंडेशन द्वारा उसके घर के बगल में स्थापित श्मशान घाट से असंतुष्टि व्यक्त की थी।
पीठ ने कहा, “हमारे सुझाव पर, पक्षकार सौहार्दपूर्ण समझौते की संभावना तलाशने के लिए सहमत हैं, जिसके तहत प्रतिवादी संख्या 13 – ईशा फाउंडेशन याचिकाकर्ता के आवासीय घर के लिए उचित और तार्किक बाजार मूल्य की पेशकश करेगा ताकि वह अपनी पसंद के किसी अन्य स्थान पर बस सके।”
पीठ ने कहा, “हमने दोनों पक्षों से इस संभावना पर विचार करने और अपने विवादों को सौहार्दपूर्ण ढंग से निपटाने के लिए गंभीरतापूर्वक आग्रह किया।”
याचिकाकर्ता एस.एन. सुब्रमणियन की ओर से पेश हुए अधिवक्ता प्रशांत भूषण द्वारा मध्यस्थ नियुक्त करने पर जोर देने के बाद, पीठ ने आदेश दिया, “इस संबंध में, हम मद्रास उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी. राजेंद्रन से अनुरोध करते हैं कि वे पक्षों के बीच मध्यस्थ के रूप में अपनी सेवाएं प्रदान करें।”
न्यायालय ने भूषण और ईशा फाउंडेशन की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी को शुक्रवार तक न्यायमूर्ति बी. राजेंद्रन से संपर्क करने और निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार उनके समक्ष पेश होने का निर्देश दिया।
मामले की अगली सुनवाई 17 अप्रैल को होगी।
भाषा प्रशांत रंजन
रंजन

Facebook


