पुरी, 20 अप्रैल (भाषा) अक्षय तृतीया के अवसर पर पूजा-अर्चना के बाद सोमवार को भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहनों की वार्षिक रथ यात्रा के लिए रथों का निर्माण कार्य शुरू हो गया।
रथ यात्रा 16 जुलाई को होनी है।
विश्वकर्मा सेवकों ने तीन अलग-अलग रथों के लिए रखी लकड़ियों पर सोने की कुल्हाड़ी से पहला प्रहार किया, जिससे रथ निर्माण की शुरुआत हुई। इससे पहले एक यज्ञ किया गया और रथ निर्माण शुरू करने के लिए भगवान द्वारा दी गई दिव्य माला को रथ खला (रथ प्रांगण) में लाया गया।
मुक्ति मंडप के मुख्य पुजारी विश्वंवर दास ने कहा, ‘हमने रथों के निर्माण के लिए ‘बनाजग’ विधि से पूजा-अर्चना की।’
अधिकारियों के अनुसार, भगवान जगन्नाथ के 45.6 फुट ऊंचे नंदीघोष रथ के निर्माण में विभिन्न प्रकार की कम से कम 742 लकड़ियों का उपयोग किया जाएगा, जबकि भगवान बलभद्र के 45 फुट ऊंचे तालध्वज रथ के निर्माण में 731 लकड़ियों का उपयोग होगा। इसी प्रकार, देवी सुभद्रा के 44.6 फुट ऊंचे दर्पदलन रथ के निर्माण में 711 लकड़ियों का उपयोग किया जाएगा।
तीनों प्रसिद्ध रथों के निर्माण और अलंकरण में 200 से अधिक लोग लगे हुए हैं।
एक अधिकारी ने बताया, “मंदिर को रथ निर्माण के लिए वन विभाग से आवश्यक लकड़ी मिल चुकी है।”
इसी बीच, प्रसिद्ध रेत कलाकार सुदर्शन पटनायक ने रथ निर्माण की शुरुआत के उपलक्ष्य में पुरी बीच पर भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की रेत से जीवंत प्रतिमा बनाई।
पटनायक ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘जय जगन्नाथ। अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर, महाप्रभु जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध वार्षिक रथ यात्रा के लिए रथ निर्माण आज शुरू हो रहा है। यह मेरी रेत कलाकृति है, जो मैंने ओडिशा के पुरी बीच पर बनाई है।’
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राखी अविनाश
अविनाश