नकली उत्पाद उपभोक्ताओं की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा : अधिकार संगठन

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नकली उत्पाद उपभोक्ताओं की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा : अधिकार संगठन

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  • Publish Date - June 10, 2026 / 07:44 PM IST,
    Updated On - June 10, 2026 / 07:44 PM IST

नयी दिल्ली, 10 जून (भाषा) उपभोक्ताओं के अधिकारों के लिए काम करने वाले एक संगठन ने बुधवार को विश्व नकली माल विरोधी दिवस के मौके पर कहा कि नकली और अवैध उत्पाद उपभोक्ताओं की सुरक्षा, जन-स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा बन गए हैं।

‘कंज्यूमर ऑनलाइन फाउंडेशन’ ने एक बयान में इस समस्या से निपटने के लिए सख्त कार्रवाई करने और जन-जागरूकता बढ़ाने की मांग की।

संगठन ने कहा कि यह मुद्दा अब सिर्फ बौद्धिक संपदा के उल्लंघन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि रोजमर्रा की ज़िंदगी में इस्तेमाल होने वाले कई तरह के उत्पादों पर भी असर डाल रहा है, जिनमें खाने-पीने की चीजें, दवाएं, सौंदर्य प्रसाधन, बिजली का सामान, बैटरी, ऑटोमोबाइल कलपुर्जे और डिजिटल उपकरण शामिल हैं।

संगठन ने कहा कि नकली उत्पाद असली ब्रांड की नकल करते हैं, जबकि अवैध उत्पाद नियामकों, कर विभाग और गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली को दरकिनार कर गैर-कानूनी तरीकों से बाजार में प्रवेश करते हैं, जिससे ग्राहकों को बड़ा जोखिम उठाना पड़ता है।

संगठन ने ‘ऑर्गनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक कोऑपरेशन एंड डेवलपमेंट’ (ओईसीडी) और ‘यूरोपियन यूनियन इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑफिस’ (ईयूआईपीओ) की मई 2025 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि नकली और पायरेटेड सामान का वैश्विक व्यापार 467 अरब अमेरिकी डॉलर के आसपास होने का अनुमान है, जो कुल वैश्विक आयात का 2.3 प्रतिशत है।

उसने ‘ऑथेंटिकेशन सॉल्यूशन प्रोवाइडर्स एसोसिएशन’ (एएसपीए) और ‘क्रेडिट रेटिंग इंफॉर्मेशन सर्विसेज ऑफ इंडिया लिमिटेड’ (क्रिसिल) की ‘स्टेट ऑफ काउंटरफीटिंग इन इंडिया 2025” रिपोर्ट का भी जिक्र किया, जिसमें कहा गया है कि पिछले साल हर तीन में से एक भारतीय उपभोक्ता को नकली उत्पाद मिला।

‘कंज्यूमर ऑनलाइन फाउंडेशन’ के संस्थापक ट्रस्टी प्रोफेसर बिजोन कुमार मिश्रा ने कहा, “आज ‘जागो ग्राहक जागो’ की भावना पहले से कहीं ज्यादा प्रासंगिक बन गई है। नकली और अवैध उत्पादों-जिनमें दवाइयों और सौंदर्य प्रसाधनों से लेकर बिजली के सामान तक शामिल हैं-से ग्राहकों को गुणवत्ता, सुरक्षा और सेहत से जुड़े गंभीर जोखिम हो सकते हैं।”

भाषा पारुल प्रशांत

प्रशांत