नयी दिल्ली, छह मार्च (भाषा) विश्व में जारी विभिन्न संघर्षों के मद्देनजर नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने शुक्रवार को कहा कि इन परिस्थितियों में देशों को अपने औद्योगिक परिसर का निर्माण करना होगा, उत्पादन के साथ-साथ प्रौद्योगिकी का उन्नयन करना होगा और ‘त्वरित अनुकूलन’ के लिए तैयार रहना होगा।
वह यहां जारी ‘रायसीना डायलॉग’ में ‘शांति के शिल्पकार: उदार व्यवस्था के लिए आयुध कारखाने’ विषय पर एक सामूहिक चर्चा में बोल रहे थे।
संवाद के दौरान उनसे विश्व के विभिन्न हिस्सों में हाल के संघर्षों से मिले कुछ ‘सबक’ के बारे में पूछा गया।
इस पर नौसेना प्रमुख ने कहा, ‘‘मैं भू-राजनीति पर टिप्पणी नहीं करूंगा। लेकिन, जो बात स्पष्ट रूप से सामने आई है, और जिसे हमने विश्व भर में, विशेष रूप से पिछले तीन-चार वर्षों में देखा है, वह यह है कि यह संक्षिप्त और निर्णायक युद्ध का विचार… सवालों के घेरे में आ सकता है।’’
उन्होंने कहा कि जिसे शीत युद्ध के बाद की शांति का लाभ माना जाता था, वह ‘निश्चित रूप से समाप्त हो गया है।’
एडमिरल त्रिपाठी ने कहा, ‘‘इसलिए देशों को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए तैयार रहना होगा, और इस स्थिति में उन्हें अपना औद्योगिक परिसर भी बनाना होगा। अधिकांश देश किसी न किसी रूप में, व्यक्तिगत रूप से या अन्य देशों के साथ साझेदारी में ऐसा कर रहे हैं।’’
आज प्रौद्योगिकी में हो रहे तेज बदलाव को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘हमें उत्पादन के साथ-साथ खुद को भी उन्नत करना होगा।’’
ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया और अन्य देशों के सदस्यों के साथ पैनल साझा करते हुए एडमिरल ने यह भी कहा कि देशों को ‘तीव्र अनुकूलन’ स्थापित करने की आवश्यकता है, और ‘‘हमें आवश्यकता पड़ने पर अपनी क्षमता बढ़ाने की जरूरत है।’’
जब उनसे पूछा गया कि क्या रूस से सैन्य ‘प्लेटफॉर्म’ प्राप्त करने से भारत की औद्योगिक परिसर के विस्तार की क्षमता प्रभावित हो रही है, तो उन्होंने कहा, ‘‘भारत में हम अन्य कई देशों की तरह आत्मनिर्भरता में विश्वास करते हैं, और हम रक्षा क्षेत्र में सह-विकास और सह-उत्पादन के आधार पर प्रौद्योगिकियों को विकसित करने के लिए अपने कई साझेदार देशों के साथ काम करते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘एक देश के रूप में, हम कई साझेदारों के साथ काम करने के तरीके से पूरी तरह अवगत हैं, और रूस उनमें से एक साझेदार है।’’
दर्शकों द्वारा भारतीय रक्षा उद्योग पर पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में, उन्होंने कहा कि नौसेना स्वदेशी समाधानों पर विचार कर रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘कुछ विशिष्ट प्रौद्योगिकियां हैं जिन पर हम कुछ संरचित कार्यप्रणालियों के तहत अपने साझेदार देशों के साथ काम कर रहे हैं। इसलिए यह स्वदेशी उत्पादन और विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ सह-विकास, सह-उत्पादन और ‘मेक इन इंडिया’ के संदर्भ में अपने भागीदारों के साथ काम करने का एक संयोजन है। हम अच्छी स्थिति में हैं, और हमें उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में भारतीय नौसेना आत्मनिर्भर हो जाएगी।’’
विदेश मंत्रालय के सहयोग से ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन द्वारा आयोजित यह संवाद, भू-राजनीति और भू-अर्थशास्त्र पर भारत का प्रमुख सम्मेलन माना जाता है, जिसमें वैश्विक नेता, नीति निर्माता, उद्योग विशेषज्ञ और शिक्षाविद एक साथ आते हैं।
संवाद के 11वें संस्करण का उद्घाटन बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में हुआ।
ऑस्ट्रेलिया की संयुक्त क्षमता समूह की प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल सुसान कॉयल, जिन्होंने शुक्रवार को एडमिरल के साथ पैनल साझा किया, ने कहा, ‘‘पूरी दुनिया क्षमता की तलाश में है, पूरी दुनिया को अधिक हथियार चाहिए, उन्हें अधिक सैन्य ‘प्लेटफॉर्म’ चाहिए, लेकिन एक उद्योग द्वारा प्रदान की जा सकने वाली क्षमता की एक सीमा होती है।’’
भाषा संतोष माधव
माधव