अदालत ने छेड़छाड़ के मामले में पिता-पुत्र को किया बरी, कहा- जांच में ‘गंभीर’ खामियां
अदालत ने छेड़छाड़ के मामले में पिता-पुत्र को किया बरी, कहा- जांच में ‘गंभीर’ खामियां
नयी दिल्ली, पांच सितंबर (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने छेड़छाड़ के आरोप से पिता-पुत्र को यह कहते हुए बरी कर दिया कि अभियोजन पक्ष के मामले में ‘‘गंभीर खामियां और विरोधाभास’’ है तथा वह आरोपों को साबित नहीं कर सका।
अदालत ने दोनों को कपड़े फाड़ने के प्रयास, जबरन घर में घुसने और आपराधिक धमकी के आरोपों से भी बरी कर दिया।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरगुरविंदर सिंह जग्गी ने प्रमोद उर्फ आकाश और उसके पिता मोहर सिंह को बरी किया। नेब सराय थाने में दोनों के खिलाफ फरवरी 2018 में हमला करने और छेड़छाड़ का मामला दर्ज किया गया था।
अदालत ने 25 अगस्त के अपने आदेश में कहा, ‘‘ अभियोजन पक्ष का मामला अपने ही विरोधाभासों के बोझ तले ढह गया है। पीड़िता ने सीधे तौर पर मोहर सिंह को आरोपों से मुक्त कर दिया। इसके अलावा प्रमोद उर्फ आकाश के खिलाफ पीड़िता की गवाही में लगातार विरोधाभास पाए गए।’’
अदालत ने कहा कि मोहर सिंह के खिलाफ मामला तब पूरी तरह से खारिज हो गया जब कथित पीड़िता ने अपनी गवाही के दौरान स्पष्ट रूप से कहा कि ‘‘आरोपी मोहर सिंह ने मेरे खिलाफ कुछ नहीं किया है।’’
इसने इस बात पर भी गौर किया कि मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज बयान मुख्य साक्ष्य नहीं होता, उसका उपयोग केवल पुष्टि या खंडन के लिए किया जा सकता है।
अदालत ने तमाम विरोधाभासों और खामियों को देखते हुए पिता-पुत्र को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
भाषा खारी शोभना
शोभना

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