अदालत ने गोलीबारी के मामले में व्यक्ति को बरी किया

अदालत ने गोलीबारी के मामले में व्यक्ति को बरी किया

अदालत ने गोलीबारी के मामले में व्यक्ति को बरी किया
Modified Date: June 1, 2026 / 04:46 pm IST
Published Date: June 1, 2026 4:46 pm IST

नयी दिल्ली, एक जून (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने 2021 के बदरपुर गोलीबारी मामले में एक आरोपी को बरी कर दिया और कहा कि अभियोजन पक्ष घटनास्थल पर आरोपी की मौजूदगी साबित नहीं कर पाया।

इस घटना में एक हेड कॉन्स्टेबल और एक अन्य व्यक्ति घायल हो गए थे।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शीतल चौधरी प्रधान, सुजीत के खिलाफ दायर मामले की सुनवाई कर रही थीं। सुजीत पर हत्या के प्रयास और लोक सेवक के कर्तव्य में बाधा उत्पन्न करने और हमला करने के आरोप थे।

अदालत ने 25 मई के अपने आदेश में कहा, ‘‘आरोपी सुजीत का नाम आरोपी किशोरों ने केवल अपने स्वीकारोक्ति या खुलासे संबंधी बयान में जांच अधिकारी को बताया था। हालांकि, जांच अधिकारी ने आरोपी की पहचान परेड (टीआईपी) तक नहीं कराई। किसी भी गवाह के बयान से घटनास्थल पर आरोपी की मौजूदगी साबित नहीं हो सकी है।’’

अभियोजन पक्ष के अनुसार, सुजीत को छह नवंबर 2021 को बदरपुर में एक पुलिस टीम पर कुछ किशोरों द्वारा की गई गोलीबारी के मामले में गिरफ्तार किया गया था। पुलिस को झगड़े की सूचना मिली थी जिसके बाद वह मौके पर पहुंची थी।

अभियोजन का आरोप था कि घटना के समय सुजीत किशोर आरोपियों के साथ मौजूद था और अपराध को अंजाम देने में उसकी भी समान मंशा तथा भूमिका थी।

हालांकि, न्यायाधीश ने गौर किया कि जांच के दौरान सुजीत की शिनाख्त परेड नहीं कराई और कथित रूप से मौके पर मौजूद कॉन्स्टेबल ने भी उसकी पहचान नहीं की। अदालत ने इस पर भी गौर किया कि घायल गवाह ने न तो सुजीत का नाम लिया, न उसे पहचाना और न ही गोलीबारी की घटना में उसकी कोई भूमिका बताई।

अदालत ने कहा, ‘‘आरोपी सुजीत पर न तो शिकायतकर्ता की ओर गोली चलाने का, न ड्यूटी के दौरान अभियोजन गवाह को रोकने का और न ही कोई हथियार रखने का कोई आरोप है।’’

अदालत ने इस पर भी गौर किया कि सुजीत से कोई बरामदगी नहीं हुई और कथित हथियार किशोर सह-आरोपी के पास से मिला था। इसके साथ ही अभियोजन पक्ष के मामले की पुष्टि करने वाले कोई स्वतंत्र सरकारी गवाह भी नहीं थे।

अदालत ने यह भी माना कि घायल गवाहों की गवाही घटना में सुजीत की कथित संलिप्तता को विश्वसनीय ढंग से स्थापित नहीं करती।

न्यायाधीश ने कहा, ‘‘मौजूदा मामले के तथ्यों और परिस्थितियों तथा गवाहों की गवाही और रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद यह नहीं कहा जा सकता कि आरोपी का दोष संदेह से परे सिद्ध हुआ है।’’

अदालत ने फैसला दिया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। इसके बाद अदालत ने सुजीत को सभी आरोपों से बरी कर दिया।

भाषा

खारी नरेश

नरेश


लेखक के बारे में