न्यायालय ने चिकित्सा आधार पर आईआईटी-खड़गपुर के छात्र को आईआईटी-रुड़की स्थानांतरण की मंजूरी दी

न्यायालय ने चिकित्सा आधार पर आईआईटी-खड़गपुर के छात्र को आईआईटी-रुड़की स्थानांतरण की मंजूरी दी

न्यायालय ने चिकित्सा आधार पर आईआईटी-खड़गपुर के छात्र को आईआईटी-रुड़की स्थानांतरण की मंजूरी दी
Modified Date: July 30, 2026 / 03:20 pm IST
Published Date: July 30, 2026 3:20 pm IST

नयी दिल्ली, 30 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी)-खड़गपुर के एक छात्र को चिकित्सा आधार पर आईआईटी-रुड़की स्थानांतरण करने की अनुतमि दे दी, जिसे ‘बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर’ है।

न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी खास शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए आर्किटेक्चर की पढ़ाई कर रहे छात्र के स्थानांतरण का आदेश दिया और संस्थान को एक सप्ताह के अंदर जरूरी स्थानांतरण प्रमाणपत्र और दूसरे दस्तावेज जारी करने का निर्देश दिया।

छात्र ने अपनी याचिका में कहा कि आईआईटी खड़गपुर द्वारा स्थानांतरण से इनकार करने के कारण वह अपना अति आवश्यक उपचार नहीं ले पा रहा है। उसने दावा किया कि संस्थान ने दूसरे छात्रों के लिए भी इसी तरह के मेडिकल आधार पर स्थानांतरण को मंजूरी दी है।

याचिका के अनुसार, छात्र को ‘बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर’ है, जिसके लिए खास तरह की थैरेपी और माता-पिता द्वारा देखरेख की जरूरत होती है।

‘बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर’, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी एक ऐसी स्थिति है जिसमें भावनाओं में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव, किसी के छोड़कर चले जाने का गहरा डर और अस्थिर रिश्ते का अहसास जैसी समस्याएं होती हैं।

भाषा शफीक नरेश

नरेश


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