अदालत ने आप सरकार को श्रम कानूनों के उल्लंघन पर सुधारात्मक कार्रवाई करने को कहा

अदालत ने आप सरकार को श्रम कानूनों के उल्लंघन पर सुधारात्मक कार्रवाई करने को कहा

अदालत ने आप सरकार को श्रम कानूनों के उल्लंघन पर सुधारात्मक कार्रवाई करने को कहा
Modified Date: November 29, 2022 / 08:01 pm IST
Published Date: September 2, 2020 12:23 pm IST

नयी दिल्ली, दो सितंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने आप सरकार को यह पता करने का निर्देश दिया है कि क्या कोई राजकीय अस्पताल न्यूनतम मजदूरी, कर्मचारी भविष्य निधि और अनुबंध श्रम नियम सहित विभिन्न श्रम कानूनों का उल्लंघन कर रहा है।

अदालत ने सरकार को इस संबंध में सुधारात्मक कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया है।

मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश जारी किया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि दिल्ली सरकार द्वारा संचालित स्वास्थ्य इकाइयों में संविदाकर्मियों का शोषण और कई श्रम कानूनों का उल्लंघन हो रहा है।

वित्तीय अर्थशास्त्री अभिजीत मिश्रा की याचिका में दावा किया गया है कि न्यूनतम वेतन कानून, 1948, कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान कानून, 1952, कर्मचारी राज्य बीमा निगम कानून, 1948, बोनस भुगतान कानून 1965 और अनुबंध श्रम विनियमन आदि का दिल्ली सरकार द्वारा संचालित अस्पतालों और औषधालयों में उल्लंघन किया जा रहा है।

पीठ ने कहा कि ऐसे उल्लंघन से निपटने के लिए इन श्रम कानूनों के तहत ‘अलग मशीनरी’ स्थापित की गई है और उन उपायों के समाप्त हो जाने के बाद ही मामला कानून के अनुसार उच्च न्यायालय में आ सकता है।

पीठ ने कहा कि इसलिए, हम इन श्रम कानूनों के उल्लंघन के संबंध में भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अपनी शक्ति का प्रयोग करते हुए इस रिट याचिका पर सुनवाई करने के पक्ष में नहीं हैं।

पीठ ने हालांकि 31 अगस्त के अपने आदेश में कहा कि हम संबंधित प्रतिवादी प्राधिकारों (दिल्ली सरकार) को निर्देश देते हैं कि याचिकाकर्ता (मिश्रा) द्वारा की गई शिकायतों पर गौर करें और अगर इन श्रम कानूनों का कोई उल्लंघन है तो उपचारात्मक कदम उठाएं और कानून के अनुसार कार्रवाई शुरू करें।

भाषा अविनाश नरेश

नरेश


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