अदालत अग्रिम जमानत खारिज कर सकती है लेकिन आत्मसमर्पण का निर्देश नहीं दे सकती: न्यायालय

अदालत अग्रिम जमानत खारिज कर सकती है लेकिन आत्मसमर्पण का निर्देश नहीं दे सकती: न्यायालय

अदालत अग्रिम जमानत खारिज कर सकती है लेकिन आत्मसमर्पण का निर्देश नहीं दे सकती: न्यायालय
Modified Date: April 26, 2026 / 06:29 pm IST
Published Date: April 26, 2026 6:29 pm IST

नयी दिल्ली, 26 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि अदालत किसी आरोपी की अग्रिम जमानत को खारिज कर सकती है, लेकिन उसे यह निर्देश देने का अधिकार नहीं है कि वह ‘निचली अदालत’ के समक्ष आत्मसमर्पण करे।

न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोपी एक व्यक्ति द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।

पीठ ने कहा, ‘‘यदि अदालत अग्रिम जमानत याचिका खारिज करना चाहती है, तो वह ऐसा कर सकती है, लेकिन उसके पास यह कहने का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है कि याचिकाकर्ता को अब आत्मसमर्पण करना चाहिए।’’

झारखंड उच्च न्यायालय ने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी और उसे आत्मसमर्पण करने एवं नियमित जमानत का अनुरोध करने के लिए कहा था।

इस मामले में, भूमि विवाद के संबंध में, भारतीय दंड संहिता की धारा 323 (जानबूझकर चोट पहुंचाना), 420 (धोखाधड़ी), 467 (मूल्यवान प्रतिभूति की जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी), 471 (जाली दस्तावेज का इस्तेमाल) और 120बी के साथ 34 के तहत अपराधों का आरोप लगाते हुए एक मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत दर्ज की गई थी।

उच्च न्यायालय ने आरोपी की दूसरी अग्रिम जमानत याचिका को इस आधार पर खारिज कर दिया था कि कोई नयी परिस्थितियां नहीं बताई गई थीं।

उच्च न्यायालय ने पूर्व के अपने आदेश का हवाला दिया, जिसमें उसकी पहली अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। उस आदेश में उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता को निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने और नियमित जमानत का अनुरोध करने का निर्देश दिया था।

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि ऐसा निर्देश देना पूरी तरह से अधिकार क्षेत्र से बाहर है और कहा कि यदि अदालत अग्रिम जमानत खारिज करना चाहे तो वह ऐसा कर सकती है, लेकिन वह आरोपी को आत्मसमर्पण करने के लिए बाध्य नहीं कर सकती।

भाषा आशीष सुरेश

सुरेश


लेखक के बारे में