अफगानिस्तान-भारत के मजबूत सियासी भरोसे और आर्थिक साझेदारी से दोनों देशों को लाभ : अहमद नूर

अफगानिस्तान-भारत के मजबूत सियासी भरोसे और आर्थिक साझेदारी से दोनों देशों को लाभ : अहमद नूर

अफगानिस्तान-भारत के मजबूत सियासी भरोसे और आर्थिक साझेदारी से दोनों देशों को लाभ : अहमद नूर
Modified Date: August 18, 2026 / 01:07 am IST
Published Date: August 18, 2026 1:07 am IST

नयी दिल्ली, 17 अगस्त (भाषा) भारत में अफगानिस्तान के प्रभारी राजदूत नूर अहमद नूर ने सोमवार को कहा कि काबुल और नयी दिल्ली के बीच मजबूत राजनीतिक भरोसा, आर्थिक साझेदारी और संबंधों की निरंतरता से न केवल दोनों देशों को लाभ होगा बल्कि इससे क्षेत्रीय स्थिरता और समृद्धि को भी बढ़ावा मिलेगा।

नूर ने यह टिप्पणी दिल्ली स्थित अफगानिस्तान के दूतावास में ‘विक्ट्री डे’ यानी 15 अगस्त 2021 को काबुल में तालिबान की सत्ता में वापसी की पांचवीं सालगिरह मनाने के लिए आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए की। पांच साल पहले तालिबान के सत्ता पर कब्ज़ा करने के बाद अफगानिस्तान की ओर नयी दिल्ली में पहली बार आधिकारिक रूप से कोई सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किया गया था।

दूतावास प्रभारी ने अफगानिस्तान इस्लामिक अमीरात की विदेश नीति को रेखांकित करते हुए कहा कि यह नीति ‘‘संतुलित जुड़ाव और दखल न देने’’ पर आधारित है और इसमें भारत के साथ प्रगाढ़ आर्थिक संबंध स्थापित करने की बात है।

इस कार्यक्रम में विदेश मंत्रालय के पाकिस्तान-अफ़गानिस्तान-ईरान संभाग के प्रमुख और संयुक्त सचिव आनंद प्रकाश भी शामिल हुए।

भारत ने अब तक आधिकारिक रूप से अफगानिस्तान की तालिबान सरकार को मान्यता नहीं दी है।

नूर ने कहा, ‘‘हमारा मानना ​​है कि अफगानिस्तान और भारत के बीच मज़बूत राजनीतिक भरोसा, आर्थिक साझेदारी और संबंधों की निरंतरता से न केवल दोनों देशों को लाभ होगा, बल्कि इससे क्षेत्रीय स्थिरता, संपर्क और साझा समृद्धि की दिशा में भी अहम योगदान मिलेगा।’’

उन्होंने भारत-अफगानिस्तान संबंधों के अलग-अलग पहलुओं को रेखांकित करते हुए कहा कि राजनयिक संपर्क बढ़े हैं, दूतावास और वाणिज्य दूतावास अधिक सक्रिय हुए हैं और पिछले कुछ सालों में दोनों पक्षों के उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडलों ने एक-दूसरे की राजधानियों का दौरा किया है।

नूर ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और मानवीय सहयोग को लेकर रचनात्मक समझ विकसित हुई है।

उन्होंने कहा, ‘‘अफगानिस्तान के प्राचीन शहरों, जैसे काबुल, हेरात और कंधार ने भारतीय व्यापारियों और कारवां का स्वागत किया, जबकि दिल्ली और लाहौर जैसे भारतीय शहरों को अफगान विद्वानों, कवियों और सूफियों के प्रभाव से लाभ हुआ।’’

नूर ने कहा, ‘‘राजनीतिक क्षेत्र में भी, दोनों देशों ने ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन से आजादी और स्वतंत्रता के संघर्ष में एक-दूसरे को प्रभावित किया। यह हमारा साझा अतीत है, जिससे हम बेहतर भविष्य के लिए प्रेरणा लेते हैं।’’

नूर ने अफगानिस्तान के ‘अंतरराष्ट्रीय अधिकारों की रक्षा और सम्मान’ के लिए भारत से समर्थन मांगा।

भाषा धीरज वैभव

वैभव


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