यूएई में भाई की हिरासत के मामले में सेलिना जेटली की याचिका पर अदालत ने कार्यवाही बंद की

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यूएई में भाई की हिरासत के मामले में सेलिना जेटली की याचिका पर अदालत ने कार्यवाही बंद की

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  • Publish Date - March 16, 2026 / 07:53 PM IST,
    Updated On - March 16, 2026 / 07:53 PM IST

नयी दिल्ली, 16 मार्च (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को अभिनेत्री सेलिना जेटली के भाई विक्रांत जेटली की संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में हिरासत से जुड़ी याचिका पर कार्यवाही बंद कर दी। अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह सेवानिवृत्त मेजर (विक्रांत जेटली) को कानूनी सहायता प्रदान करना जारी रखे।।

न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने इस बात पर गौर किया कि अबू धाबी स्थित भारतीय दूतावास विक्रांत जेटली की गिरफ्तारी के बाद से उनसे नौ बार मिल चुका है और हिरासत में लिए गए व्यक्ति ने कहा है कि उनके कानूनी प्रतिनिधित्व के संबंध में फैसला उनकी बहन को नहीं, बल्कि पत्नी को करना है। उन्होंने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा, “अब आपके पास क्या अधिकार है?”

अदालत ने कहा, “रिकॉर्ड में यह सामने आया है कि प्रतिवादी (विदेश मंत्रालय) जेटली के लगातार संपर्क में है। यह भी प्रतीत होता है कि जेटली को राजनयिक पहुंच प्रदान किया गया है। अबू धाबी स्थित भारतीय दूतावास उनसे नौ बार बातचीत कर चुका है।”

अदालत ने अपने आदेश में कहा, “रिट याचिका को लंबित रखने का कोई कारण नहीं है। इसलिए इसका निपटारा किया जाता है। प्रतिवादी जेटली के संपर्क में बना रहेगा और कानून के तहत उपलब्ध सभी प्रकार की कानूनी सहायता प्रदान करेगा।”

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि विक्रांत जेटली के कुशल-क्षेम का ध्यान भारतीय प्राधिकरणों द्वारा रखा जाना चाहिए।

उच्च न्यायालय सेलिना जेटली की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें उन्होंने अपने भाई के लिए प्रभावी कानूनी प्रतिनिधित्व की मांग की थी, जिन्हें कथित तौर पर 6 सितंबर, 2024 को यूएई में ‘अवैध रूप से अगवा कर लिया गया और हिरासत’ में रखा गया है।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालत के समक्ष कुछ जानकारी सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत की और कहा कि 18 फरवरी को हुई हालिया राजनयिक मुलाकात में विक्रांत जेटली ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह नहीं चाहते कि कोई लॉ फर्म उनका प्रतिनिधित्व करे और उन्होंने यूएई स्थित एक फर्म की नि:शुल्क (प्रो बोनो) सेवाएं लेने के अपनी बहन के सुझाव को भी ठुकरा दिया।

अदालत को यह भी बताया गया कि जेटली ने अपनी बहन से संवाद नहीं करने की इच्छा जताई है और कहा है कि कानूनी प्रतिनिधित्व से जुड़े फैसले लेने का अधिकार केवल उनकी पत्नी को है।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने यह चिंता जताई कि आखिर उनके भाई ने नि:शुल्क कानूनी सहायता लेने से इनकार क्यों किया है और अनुरोध किया कि कम से कम एक बार वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए उन्हें अपने भाई से बातचीत करने की अनुमति दी जाए।

वकील ने कहा, “हम उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, खासकर युद्ध की स्थिति को देखते हुए।”

हालांकि, दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस अनुरोध को खारिज करते हुए कहा कि वह इस मामले में “भारत सरकार के अधिकारियों, भारतीय वाणिज्य दूतावास द्वारा अधिकृत व्यक्तियों और जेटली के साथ उनकी बातचीत से मिली जानकारी” के आधार पर यह निर्णय ले रहा है।

अदालत ने कहा कि पूरी प्रक्रिया में याचिकाकर्ता और विक्रांत जेटली की पत्नी के बीच किसी आपसी विवाद का प्रश्न नहीं उठता।

अदालत ने कहा, “इस विवाद को अलग रखना होगा… जब जेटली खुद कुछ कहते हैं, तो हमें उसी का पालन करना होगा।”

भाषा रंजन दिलीप

दिलीप