अदालत ने लाल किला कार बम विस्फोट मामले में आरोपी को ‘डिफॉल्ट’ जमानत देने से इनकार किया

अदालत ने लाल किला कार बम विस्फोट मामले में आरोपी को 'डिफॉल्ट' जमानत देने से इनकार किया

अदालत ने लाल किला कार बम विस्फोट मामले में आरोपी को ‘डिफॉल्ट’ जमानत देने से इनकार किया
Modified Date: August 18, 2026 / 04:06 pm IST
Published Date: August 18, 2026 4:06 pm IST

नयी दिल्ली, 18 अगस्त (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2025 के लाल किला कार बम विस्फोट मामले में एक आरोपी जासिर बिलाल वानी उर्फ दानिश को ‘डिफॉल्ट’ जमानत देने से मंगलवार को इनकार कर दिया।

वानी ने ‘डिफॉल्ट’ जमानत याचिका खारिज करने के 30 मार्च के निचली अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह और न्यायमूर्ति विकास महाजन की पीठ ने कहा, ‘‘अदालत की राय है कि आरोपी 90 दिन के बाद इसका हकदार नहीं है। अपील खारिज किए जाने योग्य है।’’

अगर जांच एजेंसी निर्धारित समय में आरोपपत्र दाखिल करने में विफल रहती है तो आरोपी ‘डिफॉल्ट’ जमानत का हकदार हो जाता है।

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने वानी को नवंबर 2025 में गिरफ्तार किया था। उस पर मामले की साजिश में शामिल रहने का आरोप है।

एजेंसी ने आरोप लगाया है कि जासिर ने ड्रोन में बदलाव कर और रॉकेट बनाने की कोशिश कर आतंकवादी हमलों को अंजाम देने के लिए तकनीकी सहायता दी थी।

एनआईए ने दावा किया है कि उसने लाल किले के निकट विस्फोट को अंजाम देने के लिए आत्मघाती हमलावर उमर उन नबी के साथ मिलकर काम किया था।

दस नवंबर, 2025 को शाम छह बजकर 52 मिनट पर लाल किले के पास एक हुंडई आई20 कार में विस्फोट हुआ था, जिसके कारण 15 लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य लोग घायल हुए थे।

नबी की पहचान इस घातक विस्फोट में शामिल आत्मघाती हमलावर के रूप में हुई थी।

भाषा जोहेब अविनाश

अविनाश


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