अब युद्धक्षेत्र सूचना श्रेष्ठता, पल भर में निर्णय लेने से परिभाषित होता है: वायुसेना अधिकारी

अब युद्धक्षेत्र सूचना श्रेष्ठता, पल भर में निर्णय लेने से परिभाषित होता है: वायुसेना अधिकारी

अब युद्धक्षेत्र सूचना श्रेष्ठता, पल भर में निर्णय लेने से परिभाषित होता है: वायुसेना अधिकारी
Modified Date: August 18, 2026 / 03:39 pm IST
Published Date: August 18, 2026 3:39 pm IST

नयी दिल्ली, 18 अगस्त (भाषा) वायुसेना के ‘डिप्टी चीफ ऑफ एयर स्टाफ’ (डीसीएएस) एयर मार्शल तेजपाल सिंह ने मंगलवार को कहा कि हथियारों और सैन्य प्रणालियों का महत्व कभी खत्म नहीं होगा, लेकिन आज के युद्धक्षेत्र और युद्धक हवाई क्षेत्र ‘‘सूचना की श्रेष्ठता’’, नेटवर्क-केंद्रित अभियानों और सबसे महत्वपूर्ण रूप से पल भर में निर्णय लेने की क्षमता से परिभाषित होते हैं।

उन्होंने यहां आयोजित एक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि बहु-क्षेत्रीय अभियानों में सफलता तभी मिल सकती है, जब हम अपने ओओडीए (अवलोकन, स्थिति का आकलन, निर्णय लेने और कार्रवाई करने) की प्रक्रिया को कम और छोटा कर सकें।

थिंक टैंक ‘सेंटर फॉर एयरोस्पेस पावर एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज’ (सीएपीएसएस) और ‘इंडियन मिलिट्री रिव्यू’ (आईएमआर) द्वारा सुब्रतो पार्क में आयोजित इस संगोष्ठी का विषय निगरानी प्रणालियों, सी4आई2 (कमांड, नियंत्रण, संचार, कंप्यूटर्स, बुद्धिमत्ता और सूचना) तथा ‘इलेक्ट्रो-ऑप्टिक्स’ के उपयोग एवं एकीकरण पर केंद्रित था।

‘इलेक्ट्रो-ऑप्टिक्स’ ऐसी तकनीक है जिसमें इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों और प्रकाश/ऑप्टिकल प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करके किसी वस्तु को देखना, पहचानना, ट्रैक करना या निशाना साधना संभव होता है।

गत एक अगस्त को वायुसेना के नए डीसीएएस पदभार संभालने वाले एयर मार्शल सिंह ने कहा कि आज युद्धक्षेत्र में उद्देश्य है, ‘‘बेहतर तरीके से पता लगाना, तेजी से समझना, आत्मविश्वास के साथ निर्णय लेना, सटीक तरीके से कार्रवाई करना और लगातार आकलन करते रहना।’’

सिंह ने जोर देकर कहा कि सैन्य प्रणालियों और हथियारों का महत्व ‘‘कभी खत्म नहीं होगा’’, लेकिन आज के युद्धक्षेत्र और युद्धक हवाई क्षेत्र ‘‘सूचना की श्रेष्ठता, नेटवर्क-केंद्रित अभियानों और सबसे महत्वपूर्ण रूप से पल भर में निर्णय लेने’’ से परिभाषित होते हैं। इसलिए बहु-क्षेत्रीय अभियानों में सफलता तभी संभव है जब हम अपनी ओओडीए प्रक्रिया को कम और छोटा कर सकें।

डीसीएएएस ने कहा कि जैसे-जैसे नेटवर्क-केंद्रित अभियान बढ़ेंगे, ये नेटवर्क खुद भी दुश्मन के निशाने पर आ सकते हैं और इसलिए इन महत्वपूर्ण अभियानगत बाधाओं का सामना करना जरूरी है।

एयर मार्शल ने कहा कि आधुनिक नेटवर्क को हमेशा इलेक्ट्रॉनिक खतरों का सामना करना पड़ेगा- चाहे वे साइबर क्षेत्र से हों, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध से या स्पूफिंग (दुश्मन द्वारा नकली इलेक्ट्रॉनिक संकेत या डेटा भेजकर किसी सैन्य प्रणाली को भ्रमित करना) से।

सिंह ने अनुसंधान एवं विकास संगठनों और उद्योग भागीदारों से आग्रह किया कि वे सशस्त्र बलों को ऐसी प्रणालियां उपलब्ध कराएं जो ‘‘तैनाती के लिए पूरी तरह तैयार हों और आवश्यक चरम परिस्थितियों में परखी जा चुकी हों।’’

उन्होंने उद्योग भागीदारों, स्टार्टअप और लघु एवं मध्यम उद्योगों से इस क्षेत्र में ‘‘प्रतिस्पर्धा करने के बजाय सहयोग करने’’ का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि युद्ध का भविष्य निश्चित रूप से प्रणालियों और हथियारों के इर्द-गिर्द घूमता रहेगा, लेकिन तेजी से यह सूचना, एकीकरण और तेज निर्णय लेने की क्षमता पर भी निर्भर होता जाएगा।

कार्यक्रम में वायुसेना के ‘वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ’ एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित और उप थलसेना प्रमुख (क्षमता विकास एवं स्थायित्व) लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर. सिंह भी उपस्थित रहे।

भाषा गोला नेत्रपाल

नेत्रपाल


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