न्यायालय का राज्यों को खुली जेलों में रिक्त पदों को भरने के लिए प्रोटोकॉल तैयार करने का निर्देश

न्यायालय का राज्यों को खुली जेलों में रिक्त पदों को भरने के लिए प्रोटोकॉल तैयार करने का निर्देश

न्यायालय का राज्यों को खुली जेलों में रिक्त पदों को भरने के लिए प्रोटोकॉल तैयार करने का निर्देश
Modified Date: February 26, 2026 / 08:18 pm IST
Published Date: February 26, 2026 8:18 pm IST

नयी दिल्ली, 26 फरवरी (भाषा) खुली जेलों को पुनर्वास के प्रभावी संस्थानों के रूप में सुनिश्चित करने के प्रयास के तहत उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को खुली जेलों (ओसीआई) और खुली बैरकों में मौजूदा रिक्तियों को भरने के लिए एक समयबद्ध प्रोटोकॉल विकसित करने का निर्देश दिया।

अर्ध-खुली या खुली जेलें कैदियों को दिन के दौरान परिसर के बाहर काम करके आजीविका कमाने और शाम को वापस लौटने की अनुमति देती हैं। इस अवधारणा को कैदियों को समाज में एकीकृत करने और उनके मनोवैज्ञानिक दबाव को कम करने के लिए पेश किया गया है।

कई दिशा-निर्देश जारी करते हुए, शीर्ष न्यायालय ने कहा कि जेलें सुधार के संस्थान हैं, जहां गरिमा, आत्मसम्मान और सामाजिक पुन: एकीकरण महत्वाकांक्षी आदर्श नहीं बल्कि संवैधानिक आवश्यकताएं हैं।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तीन महीने की अवधि के भीतर अपनी-अपनी निगरानी समितियों को प्रोटोकॉल प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

पीठ ने कहा, ‘‘यह सुनिश्चित करें कि चिन्हित रिक्तियों को पात्रता और सुरक्षा संबंधी विचारों को ध्यान में रखते हुए, दो महीने की अवधि के भीतर भरा जाए।’’

अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मौजूदा खुली जेलों के पुनर्गठन के लिए प्रोटोकॉल विकसित करने के दौरान महिला कैदियों के बारे में भी ध्यान दिए जाने का निर्देश दिया।

ये निर्देश जेलों में भीड़भाड़ और जेलों के कामकाज से संबंधित एक जनहित याचिका पर आए हैं।

भाषा शफीक माधव

माधव


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