नयी दिल्ली, 17 जुलाई (भाषा) देश भर की ज़िला अदालतों में बुनियादी सुविधाओं की कमी को देखते हुए, उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा कि वे सभी अदालतों में शौचालय सुविधा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाएं।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि शौचालयों की सुविधा बुनियादी मानवाधिकार है और धन की कमी इसके लिए कोई बहाना नहीं हो सकती।
उच्चतम न्यायालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस मामले पर छह सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
पीठ ने मौखिक रूप से कहा, ‘‘महिला वकीलों के काम करने की खराब हालत पर ध्यान दें। सभी महाधिवक्ताओं को ज़मीनी स्तर पर असल स्थिति का पता लगाना चाहिए और कदम उठाने चाहिए। सिर्फ़ यह कह देना कि धन नहीं है, काफ़ी नहीं है, क्योंकि यह बुनियादी मानवाधिकारों के ख़िलाफ़ है। शराब या सिगरेट पर अतिरिक्त शुल्क लगाएं, और हम उसे सही ठहराएंगे।’’
उच्चतम न्यायालय उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें देश भर की अदालतों में महिला वकीलों के लिए बार रूम और अन्य आवश्यक सुविधाओं के न होने का मुद्दा उठाया गया था।
भाषा नेत्रपाल पवनेश
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