जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक को हटाए जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका अदालत ने खारिज की

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जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक को हटाए जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका अदालत ने खारिज की

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  • Publish Date - July 22, 2026 / 05:33 PM IST,
    Updated On - July 22, 2026 / 05:33 PM IST

नयी दिल्ली, 22 जुलाई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने कथित परीक्षा अनियमितताओं के विरोध में अनिश्चितकालीन अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को उनके अनशन के 21वें दिन जंतर-मंतर से जबरन हटाकर सफदरजंग अस्पताल ले जाने के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका बुधवार को खारिज कर दी।

मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने कहा कि वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती किए जाने का मुद्दा पहले उनकी पत्नी द्वारा उच्च न्यायालय के समक्ष उठाया जा चुका है और उस मामले का ‘उनकी संतुष्टि के अनुसार निस्तारण किया जा चुका है।’

पीठ ने कहा कि घटना से जुड़ी चिंताओं और अनुरोधों को दोबारा उठाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने याचिकाकर्ता शकील अब्बास से कहा कि यदि उन्हें अब भी शिकायत है तो वह प्राथमिकी दर्ज कराने का सहारा ले सकते हैं।

अदालत ने कहा, ‘चूंकि एक कथित एकल घटना के संबंध में प्राथमिकी दर्ज कराने का अनुरोध किया गया है, इसलिए याचिकाकर्ता के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 173 के तहत उपलब्ध उपाय अपनाना हमेशा खुला है।’

पीठ ने कहा, ‘हम इस रिट याचिका पर विचार करने के इच्छुक नहीं हैं। इसलिए इसे खारिज किया जाता है।’

गत 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने वांगचुक को उनके अनशन के 21वें दिन जंतर-मंतर स्थित प्रदर्शन स्थल से हटाकर जबरन सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया था।

याचिकाकर्ता ने अदालत से ‘‘18 जुलाई 2026 को जंतर-मंतर पर हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन को तितर-बितर करने के दौरान कथित तौर पर ‘संज्ञेय अपराध’ करने वाले’’ सभी पुलिसकर्मियों और अन्य अधिकारियों के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने तथा निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का अनुरोध किया था।

याचिका में वांगचुक को जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले जाने से संबंधित सभी चिकित्सकीय रिपोर्ट, उपचार करने वाले चिकित्सकों की राय और निर्णय लेने की प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का भी निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।

इसके अलावा, वांगचुक के परिवार के सदस्यों और उनके वकीलों को अस्पताल में उनसे मिलने की अनुमति देने तथा प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्ण विरोध के अपने संवैधानिक अधिकार का प्रयोग करने देने का भी अनुरोध किया गया था।

उल्लेखनीय है कि उच्च न्यायालय ने वांगचुक को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल से तत्काल गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल स्थानांतरित करने का मंगलवार को निर्देश दिया था।

उक्त आदेश वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो की उस अपील पर पारित किया गया था, जिसमें उन्होंने उच्च न्यायालय की एकल पीठ के रविवार के आदेश को चुनौती दी थी। एकल पीठ ने सफदरजंग अस्पताल में वांगचुक के उपचार में दखल देने से इनकार कर दिया था।

भाषा अमित नरेश

नरेश