नयी दिल्ली, 19 जून (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने 21 जून को होने वाली नीट-यूजी पुन: परीक्षा से पहले सोशल मीडिया मंच ‘टेलीग्राम’ तक पहुंच को अस्थायी रूप से प्रतिबंधित करने के केंद्र सरकार के कदम को शुक्रवार को बरकरार रखा और कहा कि यह आदेश ‘‘अनुचित नहीं’’ है।
फैसले के मुख्य अंशों को मौखिक रूप से सुनाते हुए न्यायाधीश तेजस करिया की अवकाशकालीन पीठ ने कहा, ‘‘सभी दलीलों पर विचार करने के बाद, हम पाते हैं कि आपात स्थिति को देखते हुए, दिए गए कारण पर्याप्त हैं और सरकार ने धारा 69ए में दी गई प्रक्रिया का पालन किया है।’’
सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम, 2000 की धारा 69ए, केंद्र सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और संप्रभुता की रक्षा के लिए किसी भी ऑनलाइन जानकारी, वेबसाइटों या एप्लीकेशन तक सार्वजनिक पहुंच को अवरुद्ध करने का अधिकार देती है।
न्यायाधीश ने कहा कि टेलीग्राम की उस याचिका को सच नहीं माना जा सकता जिसमें कारणों की जानकारी न दिए जाने का दावा किया गया था।
उन्होंने कहा कि केंद्र के आदेश ‘‘तथ्यों पर आधारित और कारणों से समर्थित’’ हैं, और इन आदेशों में विवेक का इस्तेमाल न किए जाने जैसी कोई बात नहीं है।
न्यायाधीश करिया ने कहा, ‘‘प्रतिवादी एक (केंद्र) को धारा 69ए के तहत टेलीग्राम तक पहुंच को अवरुद्ध करने का निर्देश देने का अधिकार है। यह कार्रवाई पूरी तरह से आनुपातिक यानी न्यायसंगत है। (अस्थायी रोक को लेकर) सरकार द्वारा अपनाया गया सबसे कम प्रतिबंधात्मक उपाय है। यह नहीं माना जा सकता कि आदेश अनुचित है।’’
टेलीग्राम ने सोशल मीडिया मध्यस्थों के बीच खुद को अलग-थलग किए जाने के कारण भेदभावपूर्ण व्यवहार और अनुच्छेद 14 के उल्लंघन का हवाला देते हुए अदालत का रुख किया था।
इसने यह भी दावा किया कि उसने नीट की अवैध सामग्री से जुड़े 900 से अधिक लिंक हटा दिए हैं और उल्लंघनों की पहचान करने के लिए कृत्रिम मेधा, मशीन लर्निंग टूल और मैनुअल मॉडरेशन का इस्तेमाल किया है।
इसने दावा किया कि उसने मई से सरकारी एजेंसियों के साथ कई बैठकें कीं और सक्रिय तथा प्रतिक्रियात्मक दोनों तरह के उपायों को रेखांकित करते हुए विस्तृत जवाब सौंपे।
टेलीग्राम ने दावा किया कि नौ जून को अधिकारियों से विशिष्ट यूआरएल प्राप्त करने के बाद, उसने एक घंटे के भीतर चिह्नित सामग्री को हटा दिया था।
अदालत ने बृहस्पतिवार को बहस के दौरान सॉलिसिटर जनरल से सवाल पूछा था कि क्या केवल कुछ विद्यार्थियों के दोबारा परीक्षा में बैठने के कारण 15 करोड़ से अधिक टेलीग्राम उपयोगकर्ताओं के अधिकारों को कम करना सही है।
अदालत ने कहा था, ‘‘हम सिर्फ इसलिए अन्य उपयोगकर्ताओं के अधिकारों को कैसे रोक सकते हैं कि नागरिकों का एक समूह परीक्षा में शामिल हो रहा है?’’
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने प्रश्नपत्र लीक के आरोपों के बीच मेडिकल प्रवेश के लिए तीन मई को आयोजित राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (स्नातक) को 12 मई को रद्द कर दिया था।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) इस मामले की जांच कर रहा है और पुन: परीक्षा 21 जून को होगी।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) ने एनटीए की सिफारिशों पर कार्रवाई करते हुए सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69ए के तहत 16 जून को एक निर्देश जारी किया था, जिसमें भारत में 22 जून तक टेलीग्राम तक पहुंच को प्रतिबंधित कर दिया गया है।
भाषा खारी रंजन
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