नयी दिल्ली, 11 अगस्त (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने छत्तीसगढ़ में दर्ज साइबर धोखाधड़ी के एक मामले में वांछित एक व्यक्ति को ‘ट्रांजिट अग्रिम जमानत’ देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि केवल शहर के एक होटल में थोड़े समय के लिए ठहरने के आधार पर कोई व्यक्ति दिल्ली की अदालत से संरक्षण का अनुरोध नहीं कर सकता।
सुलेंद्र शाह की ओर से दायर याचिका पर अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समर विशाल सुनवाई कर रहे थे, जिसमें उसने छत्तीसगढ़ की अदालत का रुख करने के लिए ट्रांजिट अग्रिम जमानत का अनुरोध किया था। छत्तीसगढ़ में उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज है।
दस अगस्त को पारित आदेश में अदालत ने कहा, ‘होटल में अस्थायी रूप से ठहरना, जब तक कि उसके साथ सामान्य निवास, रोजगार, पेशा, व्यवसाय या इलाके से किसी अन्य वास्तविक संबंध का कोई प्रमाण न हो, अपने आप में इस अदालत को ट्रांजिट अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई का क्षेत्राधिकार नहीं देता।’
शाह ने दावा किया था कि वह दिल्ली के मालवीय नगर में रह रहा है। हालांकि, जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि उसके द्वारा दिया गया पता केवल दिल्ली के एक होटल में दो रात की बुकिंग पर आधारित था और इससे यह साबित नहीं होता कि वह शहर का निवासी है।
जांच एजेंसी ने दलील दी कि आरोपी ने दिल्ली में जमानत याचिका दाखिल करने का आधार तैयार करने के लिए ही होटल में ठहरने की व्यवस्था की, जबकि उसे छत्तीसगढ़ में उचित अदालत जाना चाहिए था।
अदालत ने इस आपत्ति को स्वीकार करते हुए कहा कि आरोपी ऐसा कोई दस्तावेज पेश नहीं कर सका, जिससे यह साबित हो कि वह दिल्ली में रहता है, काम करता है, कारोबार करता है या उसका शहर से कोई अन्य वास्तविक संबंध है।
न्यायाधीश ने कहा, ‘यदि इस तरह के आधार को स्वीकार कर लिया जाता है, तो कोई भी आरोपी केवल किसी इलाके में अस्थायी रूप से ठहरकर अपनी सुविधा के अनुसार अदालत का चयन कर सकेगा। इससे क्षेत्रीय संबंध की अनिवार्यता महज औपचारिकता बन जाएगी और ऐसी अदालत चुनने की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलेगा, जिसके खिलाफ उच्चतम न्यायालय ने चेतावनी दी है।’
अदालत ने याचिका को ‘अदालत के चयन (फोरम शॉपिंग) का एक स्पष्ट उदाहरण’ बताते हुए कहा कि याचिकाकर्ता दिल्ली से किसी वास्तविक क्षेत्रीय संबंध को स्थापित करने में विफल रहा है। इसके बाद अदालत ने उसकी याचिका खारिज कर दी।
न्यायाधीश ने कहा, ‘रिकॉर्ड पर रखी गई सामग्री से पता चलता है कि यह याचिका केवल होटल में अस्थायी ठहरने के आधार पर दायर की गई है। इसलिए यह याचिका अदालत के चयन की प्रवृत्ति और न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग का स्पष्ट उदाहरण प्रतीत होती है।’
अदालत ने स्पष्ट किया कि यह आदेश शाह के खिलाफ लगाए गए आरोपों के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं करता है और उचित क्षेत्राधिकार वाली अदालत के समक्ष उपलब्ध उसके किसी भी कानूनी उपाय को प्रभावित नहीं करेगी।
भाषा अमित दिलीप
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