प्रयागराज, 21 अप्रैल (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने प्रयागराज में स्वरूपरानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल में प्रस्तावित मल्टी-स्पेशियलिटी सुविधा के निर्माण के लिए आवश्यक भूमि के हस्तांतरण के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) में अत्यधिक विलंब पर सख्त नाराजगी जताई है।
अदालत ने कहा कि यह परियोजना करीब आठ महीनों से प्रक्रियागत बाधाओं के चलते लंबित है और इससे प्रयागराज में स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार को लेकर राज्य सरकार की उदासीनता झलकती है।
इस मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने सोमवार को कहा, “ऐसा लगता है कि राज्य सरकार इस मामले को और खींचना चाहती है और उसकी प्रयागराज में चिकित्सा सुविधाओं को अद्यतन कराने में कोई खास रुचि नहीं है।”
अदालत ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा विभाग के विशेष सचिव द्वारा दाखिल हलफनामे में आवश्यक एनओसी हासिल करने में एक निश्चित समय सीमा स्पष्ट नहीं की गई है।
अदालत ने विशेष सचिव को एक विस्तृत हलफनामा दाखिल कर वह समय सीमा बताने को कहा जिसके भीतर शहरी विकास विभाग से भूमि हस्तांतरण के लिए सहमति ली जाएगी।
साथ ही अदालत ने मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य को स्नातक और स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के लिए छात्रावास सुविधाओं पर निरीक्षण रिपोर्ट के संबंध में एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया।
इस मामले में अगली सुनवाई 29 अप्रैल को की जाएगी। अदालत ने कॉलेज के प्रधानाचार्य को अगली तिथि पर सुनवाई के दौरान उपस्थित रहने का निर्देश दिया।
यह मामला मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर डाक्टर अरविंद गुप्ता की एक याचिका से शुरू हुआ जिस पर पिछले डेढ़ साल से सुनवाई जारी है। शुरुआत में यह एक निजी अस्पताल में इलाज को लेकर एक उपभोक्ता विवाद से जुड़ा था और उच्च न्यायालय पहुंचने से पूर्व यह मामला जिला और राज्य उपभोक्ता मंचों तक गया।
सुनवाई के दौरान, उच्च न्यायालय ने सरकारी अस्पतालों में आधारभूत ढांचों और सरकारी चिकिस्तकों द्वारा निजी प्रैक्टिस समेत व्यापक मुद्दों को स्वतः संज्ञान में लिया।
प्रयागराज के जिला मजिस्ट्रेट ने 17 अप्रैल को अदालत को बताया था कि उक्त भूमि का कुछ हिस्सा शहरी विकास विभाग के अधीन है जिसके लिए इसकी मंजूरी आवश्यक है।
भाषा सं राजेंद्र अमित
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