अदालत ने अभिनेता गौरव बख्शी के खिलाफ प्राथमिकी रद्द की

Ads

अदालत ने अभिनेता गौरव बख्शी के खिलाफ प्राथमिकी रद्द की

  •  
  • Publish Date - August 19, 2026 / 08:09 PM IST,
    Updated On - August 19, 2026 / 08:09 PM IST

पणजी, 19 अगस्त (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने अभिनेता गौरव बख्शी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी है। अदालत ने कहा कि किसी लोक सेवक से यह कहना आपराधिक धमकी नहीं माना जा सकता कि वह सतर्कता प्राधिकारियों के पास जाएगा।

उच्च न्यायालय की गोवा पीठ के न्यायमूर्ति अमित एस. जामसंडेकर ने 18 अगस्त के अपने आदेश में पणजी पुलिस थाने में दर्ज प्राथमिकी, आरोपपत्र और मर्सेस स्थित न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत में जारी कार्यवाही रद्द कर दी।

बारह दिसंबर, 2025 को दर्ज प्राथमिकी में बख्शी पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने तिसवाड़ी के मामलतदार (तालुका स्तर के राजस्व अधिकारी) कार्यालय के एक कर्मचारी के साथ कथित रूप से दुर्व्यवहार किया, उसे धमकी दी और भूमि परिवर्तन संबंधी फाइल को लेकर कार्यालय में हंगामा किया।

अभियोजन पक्ष का आरोप था कि बख्शी ने अधिकारी से कथित तौर पर कहा था, ‘‘मैं तुम्हें दिखा दूंगा और मैं तुम्हारे खिलाफ सतर्कता मामला दर्ज कराऊंगा और तुम्हारी नौकरी चली जाएगी।’’

अदालत ने कहा कि शिकायत में लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह सही मान भी लिया जाए, तब भी उनमें शारीरिक नुकसान, प्रतिष्ठा को नुकसान या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की कोई धमकी नहीं दिखाई देती।

अदालत ने कहा कि ऐसा कोई आरोप नहीं है कि शिकायतकर्ता को अपनी सुरक्षा, प्रतिष्ठा या संपत्ति को लेकर अचानक डर या तत्काल खतरे की आशंका महसूस हुई हो।

अदालत ने विशेष रूप से कहा कि सतर्कता प्राधिकारियों के पास जाने या शिकायत दर्ज कराने की धमकी मात्र भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 351(3) के तहत आपराधिक डराने-धमकाने का अपराध नहीं हो सकती।

अदालत ने कहा, ‘‘कोई व्यक्ति दूसरे को यह बताए कि वह कानूनी उपाय का सहारा लेगा, इसे बीएनएस की धारा 351(3) के तहत नुकसान पहुंचाने की धमकी नहीं माना जा सकता।’’

अदालत ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष ने बख्शी पर कार्यालय के शांतिपूर्ण कामकाज में बाधा डालने और अधिकारी को अपना कर्तव्य निर्वहन से रोकने के आरोप लगाए थे। हालांकि, अदालत ने कहा कि केवल अभद्र या अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना या दो व्यक्तियों के बीच बहस होना अपने आप में अपराध नहीं बन जाता, जब तक संबंधित अपराध के लिए जरूरी कानूनी तत्व पूरे न हों।

अदालत ने बख्शी की ओर से दी गई दलीलों को स्वीकार करते हुए राज्य की दलीलों को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि आपराधिक कार्यवाही जारी रखना अनुचित होगा, न्याय के हितों के खिलाफ होगा और कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।

भाषा अमित वैभव

वैभव