नयी दिल्ली, 19 जनवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को एनडीटीवी के संस्थापकों प्रणय रॉय और राधिका रॉय को भेजे गए 2016 के आयकर नोटिस को रद्द कर दिया और विभाग को सांकेतिक लागत के रूप में उनमें से प्रत्येक को एक लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया।
न्यायमूर्ति दिनेश मेहता और विनोद कुमार की पीठ ने टिप्पणी की कि अधिकारियों द्वारा प्रणय रॉय और राधिका रॉय को “लगभग उसी मुद्दे के लिए” दूसरी बार पुनर्मूल्यांकन कार्यवाही के अधीन करना मनमाना और अधिकार क्षेत्र से बाहर था।
पीठ ने रॉय परिवार की याचिकाओं को स्वीकार करते हुए कहा, “इस मामले के तथ्य स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि कार्यवाही मनमानी और वैधानिक प्रावधानों के विपरीत होने के साथ-साथ न्यायिक प्रक्रिया के मूलभूत सिद्धांतों के भी विरुद्ध है।”
अदालत ने कहा, “याचिकाकर्ता(कों) को दिनांक 31.03.2016 को जारी की गई आक्षेपित नोटिसों और साथ ही इसके परिणामस्वरूप जारी किए गए सभी आदेश या कार्यवाही रद्द की जाती हैं। इन मामलों में किसी भी प्रकार का हर्जाना पर्याप्त नहीं माना जा सकता, फिर भी हम इन मामलों को बिना हर्जाना लगाए नहीं छोड़ सकते। इसलिए, हम प्रतिवादियों पर प्रत्येक मामले में 1,00,000 रुपये का सांकेतिक जुर्माना लगाते हैं, जिसे प्रत्येक याचिकाकर्ता को भुगतान किया जाना है।”
आयकर नोटिस याचिकाकर्ताओं की वर्ष 2009-10 की आय के पुनर्मूल्यांकन से संबंधित था, जो कि एनडीटीवी की प्रवर्तक इकाई आरआरपीआर होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड से प्राप्त कुछ “ब्याज-मुक्त” ऋणों के कारण था।
याचिकाकर्ता उस समय आरआरपीआर के अंशधारक और निदेशक थे।
पुनर्मूल्यांकन कार्यवाही का पहला दौर 2011 में शुरू हुआ और 2013 में समाप्त हुआ।
एक शिकायत के आधार पर 31 मार्च 2016 को पुनर्मूल्यांकन के लिए नोटिस जारी किए गए। उच्च न्यायालय ने 2017 में मूल्यांकन अधिकारी के समक्ष कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।
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प्रशांत माधव
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