नयी दिल्ली, सात सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने उच्चाधिकार प्राप्त समिति को अरावली पहाड़ियों की परिभाषा और संरक्षण पर अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए छह महीने का अतिरिक्त समय देने से सोमवार को इनकार कर दिया।
भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने समिति को 30 नवंबर तक अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया और चेतावनी दी कि ऐसा न करने पर समिति का पुनर्गठन किया जाएगा।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘समिति अरावली के मुद्दे पर रिपोर्ट सौंपने के लिए दिन-रात काम करे। यदि वह दो महीने में ऐसा नहीं कर पाती है तो हम पूरी समिति का पुनर्गठन करेंगे।’’
उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित अरावली उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने अंतिम रिपोर्ट सौंपने की समयसीमा छह महीने बढ़ाने का अनुरोध किया था। समिति ने कहा था कि अरावली पर्वतमाला का ‘‘व्यापक और ठोस आधार वाला’’ आकलन करने के लिए उसे और समय चाहिए।
अरावली पहाड़ियों की परिभाषा को लेकर हुए विवाद के बीच न्यायालय ने पिछले साल दिसंबर में इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया था।
भाषा सिम्मी मनीषा
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