पूर्व प्रभाव से पर्यावरणीय मंजूरी से संबंधित जयराम रमेश की याचिका पर न्यायालय का सुनवाई से इनकार

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पूर्व प्रभाव से पर्यावरणीय मंजूरी से संबंधित जयराम रमेश की याचिका पर न्यायालय का सुनवाई से इनकार

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  • Publish Date - February 12, 2026 / 01:41 PM IST,
    Updated On - February 12, 2026 / 01:41 PM IST

नयी दिल्ली, 12 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने परियोजनाओं को पूर्व प्रभाव से दी गई पर्यावरणीय मंजूरी से संबंधित कांग्रेस नेता जयराम रमेश की याचिका पर बृहस्पतिवार को सुनवाई से इनकार कर दिया।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सवाल उठाया कि याचिकाकर्ता रिट याचिका के माध्यम से न्यायालय के पूर्व के फैसले की समीक्षा का अनुरोध कैसे कर सकते हैं।

प्रधान न्यायाधीश ने रमेश की ओर से पेश वकील से कहा, ‘‘कृपया हमें बताएं कि यह रिट याचिका कैसे सुनवाई योग्य है। हम इस तरह की रिट याचिकाओं की मंशा को जानते हैं। एक फैसला आया था, जिसे समीक्षा के दौरान एक वृहद पीठ ने रद्द कर दिया था। अब आप अप्रत्यक्ष रूप से समीक्षा याचिका दायर कर रहे हैं।’’

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘जुर्माने के लिए तैयार रहें।’’

जब पीठ ने याचिका पर विचार करने में अनिच्छा दिखाई, तो वकील ने इसे वापस लेने का अनुरोध किया।

इस पर पीठ ने उन्हें याचिका वापस लेने की अनुमति दी और साथ ही कानून के अनुसार उपाय करने की स्वतंत्रता भी प्रदान की।

पिछले साल 18 नवंबर को शीर्ष अदालत ने अपने ही फैसले को पलटते हुए केंद्र और अन्य अधिकारियों द्वारा पर्यावरण मानदंडों का उल्लंघन करने वाली परियोजनाओं को भारी जुर्माने के भुगतान पर पूर्व प्रभाव से पर्यावरणीय मंजूरी देने का मार्ग प्रशस्त किया। अदालत ने इस बात पर गौर किया कि ऐसे मामलों में पर्यावरणीय मंजूरी नहीं मिलने से ‘‘हजारों करोड़ रुपये बर्बाद हो जाएंगे’’।

शीर्ष अदालत ने मामले में दो अनुपात एक के बहुमत से निर्णय सुनाया था। न्यायालय ने कहा था कि अगर केंद्र को परियोजनाओं को पूर्व प्रभाव से पर्यावरणीय मंजूरी देने से रोकने से संबंधित 16 मई के फैसले को वापस नहीं लिया जाता है तो लगभग 20,000 करोड़ रुपये की सार्वजनिक निधि से निर्मित कई महत्वपूर्ण सार्वजनिक परियोजनाओं को ध्वस्त करना पड़ेगा।

बृहस्पतिवार को सुनवाई के दौरान पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा कि उन्होंने नयी रिट याचिका क्यों दायर की है।

पीठ ने कहा, ‘‘आप जानते हैं कि तीन न्यायाधीशों की पीठ इस पर अपना मत व्यक्त कर चुकी है।’’

वकील ने जनवरी के एक कार्यालय ज्ञापन का हवाला देते हुए कहा कि इसे उच्चतम न्यायालय के फैसले को प्रभावी बनाने के लिए जारी किया गया था।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘तो क्या आप रिट याचिका में किसी फैसले को चुनौती दे सकते हैं? जब इस अदालत द्वारा फैसला सुनाया जा चुका है और सरकार ने उस फैसले के अनुपालन में एक अधिसूचना भी जारी कर दी है तो आप उस अधिसूचना को चुनौती देंगे?’’

उन्होंने यह भी कहा कि याचिका केवल मीडिया में सुर्खियां बटोरने के लिए दायर की गई है।

भाषा सुरभि शफीक

शफीक