अदालत का निजी स्कूलों को वार्षिक, विकास शुल्क लेने की अनुमति देने वाले आदेश पर रोक लगाने से इनकार
अदालत का निजी स्कूलों को वार्षिक, विकास शुल्क लेने की अनुमति देने वाले आदेश पर रोक लगाने से इनकार
नयी दिल्ली, सात जून (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने निजी स्कूलों को पिछले साल लॉकडाउन खत्म होने के बाद की अवधि के लिए विद्यार्थियों से वार्षिक और विकास शुल्क लेने की अनुमति देने वाले एकल न्यायाधीश के आदेश पर रोक लगाने से सोमवार को यह कहते हुए इनकार कर दिया कि यदि आप सरकार इतनी लोकप्रिय है तो वह विद्यालयों को कुछ फंड से मदद कर सकती है।
न्यायमूर्ति रेखा पल्ली और न्यायमूर्ति अमित बंसल की अवकाशकालीन पीठ ने 450 निजी स्कूलों का प्रतिनिधित्व करने वाले ‘एक्शन कमेटी अनएडिड रिकॉग्नाइज्ड प्राइवेट स्कूल्स’ को नोटिस जारी किया और उससे एकल न्यायाधीश के आदेश के 31 मई के फैसले खिलाफ आप सरकार और छात्रों की अपीलों पर जवाब मांगा।
अदालत ने कहा , ‘‘ हम इस स्थगन आवेदन को खारिज कर रहे हैं। ’’ इसी के साथ अदालत ने कहा कि कारणों सहित विस्तृत आदेश बाद में उपलब्ध कराया जाएगा। उसने आगे की सुनवाई के लिए मामले को 10 जुलाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
पीठ ने कहा, ‘‘ बस लोकप्रिय सरकार ही नहीं बनिए बल्कि स्कूलों को भी धन दीजिए। उन्हें स्कूल चलाने के लिए पैसे की जरूरत है। उन्हें कर का भी भुगतान करना होता है। ’’
अदालत ने कहा, ‘‘ यदि आप लोकप्रिय सरकार बनना चाहते हैं तो कृपया उनकी मदद कीजिए। कुछ कीजिए, कौन आपको रोक रहा है।’’
अदालत ने एक्शन कमेटी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान का बयान दर्ज किया कि अगली सुनवाई की तारीख तक वे विद्यार्थियों से फीस वसूली के संबंध में वर्तमान सिद्धांतों का पालन करते रहेंगे।
दिल्ली सरकार, विद्यार्थियों और ‘जस्टिस फोर ऑल’ नामक एनजीओ ने दलील दी कि एकल न्यायाधीश का फैसला गलत तथ्यों पर आधारित था।
एकल पीठ ने 31 मई के अपने आदेश में दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय द्वारा अप्रैल और अगस्त 2020 में जारी दो कार्यालय आदेशों को निरस्त कर दिया था, जो वार्षिक शुल्क और विकास शुल्क लेने पर रोक लगाते तथा स्थगित करते हैं। अदालत ने कहा था कि वे ‘अवैध’ हैं और दिल्ली स्कूल शिक्षा (डीएसई) अधिनियम एवं नियमों के तहत शिक्षा निदेशालय को दी गयी शक्तियों से परे है।
दिल्ली सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह और संतोष कुमार त्रिपाठी ने कहा कि एकल न्यायाधीश ने स्कूल फीस से वसूली से संबंधित उच्चतम न्यायालय के आदेश के आधार पर निर्देश जारी कर भारी भूल की है ।
विद्यार्थियों की ओर से दायर अपीलों में दावा किया गया है कि विद्यालय बंद होने की अवधि में भवन की मरम्मत, प्रशासनिक व्यय, किराये, छात्रावास व्यय जैसे प्रतिष्ठान शुल्क तब लागू नहीं होते हैं।
भाषा राजकुमार अनूप
अनूप

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