नयी दिल्ली, 11 अगस्त (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने पूर्व जूनियर नेशनल रेसलिंग चैंपियन सागर धनखड़ की हत्या के मामले में ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार को ज़मानत देने से इनकार कर दिया है।
न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार ने छह अगस्त को उच्चतम न्यायालय द्वारा पहलवान की पिछली ज़मानत रद्द करते समय गवाहों को प्रभावित करने को लेकर जताई गई चिंता, गिरफ़्तारी से पहले उनके व्यवहार, अपराध की गंभीरता और जारी मुक़दमे के नतीजे को प्रभावित करने की उनकी क्षमता जैसे कई कारणों का उल्लेख करते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी।
न्यायाधीश ने उल्लेख किया कि आम तौर पर ज़मानत मिलना नियम है और जेल अपवाद, लेकिन इस मामले में अपराध पहले से सोच-समझकर किया गया और हमला बेरहमी से किया गया जिसके कारण मौत हुई।
इसने कहा कि इस बात की पुष्टि हथियार की बरामदगी, वीडियो सबूत और अनेक ऐसे सबूतों से होती है जिनकी अभी मुकदमे के दौरान पड़ताल होनी बाकी है।
दिल्ली पुलिस और धनखड़ के पिता ने ज़मानत अर्ज़ी का विरोध किया।
अदालत ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने पिछली ज़मानत रद्द करते हुए इस बात को आधार बनाया कि कुमार का समाज में काफ़ी रुतबा और प्रभाव है, और जब भी उसे कुछ समय के लिए रिहाई दी गई, तो गवाह मुकर गए।
इसने कहा कि याचिकाकर्ता ऐसा कोई मामला नहीं बना पाया है जिससे यह साबित हो सके कि उच्चतम न्यायालय द्वारा दी गई छूट के तहत हालात में कोई वास्तविक बदलाव आया है, या फिर उसे अलग से नियमित ज़मानत दी जानी चाहिए।
कुमार को मई 2021 में गिरफ़्तार किया गया था और 19 जुलाई 2023 को सत्र अदालत ने उन्हें घुटने की सर्जरी के लिए एक हफ़्ते की अंतरिम ज़मानत दी थी।
उच्चतम न्यायालय ने 13 अगस्त 2025 को उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द करते हुए इस मामले में कुमार की ज़मानत ख़त्म कर दी थी। न्यायालय ने कहा कि गवाहों पर उनके ‘‘दबाव डालने वाले प्रभाव’’ या मुक़दमे की कार्यवाही में देरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
उच्च न्यायालय ने उसे 4 मार्च, 2025 को ज़मानत दे दी थी।
भाषा
नेत्रपाल नरेश
नरेश