लखनऊ, 11 अगस्त (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार को दो बाल सुधार गृहों के लिए लंबित गैर-आवर्ती अनुदान छह सप्ताह के भीतर जारी करने का निर्देश दिया।
पीठ ने करीब तीन साल से अनुदान लंबित रहने पर आश्चर्य और नाराजगी जताई।
मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की पीठ अनूप गुप्ता की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
अदालत विशेष देखभाल की जरूरत वाले बच्चों के कल्याण के लिए काम करने वाले गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) को समय पर धनराशि उपलब्ध कराए जाने के मामले की निगरानी कर रही है।
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि ज्यादातर एनजीओ द्वारा संचालित गृहों को अनुदान राशि मिल चुकी है लेकिन ग्रामीण विकास समिति, चारू, गोंडा और ‘राजसी डेवलपमेंट एंड रिसर्च संस्थान’ के लिए अनुदान वर्ष 2023-24 से लंबित है। पीठ ने इस पर कहा कि अगर अनुदान समय पर जारी कर दिया जाता तो संबंधित गृह उस राशि का समय पर उपयोग कर सकते थे।
पीठ ने चेतावनी दी कि देरी जारी रहने पर अदालत दोनों सुधार गृहों को विलंबित भुगतान के कारण हुए नुकसान के लिए मुआवजा देने पर विचार कर सकती है।
पीठ को यह भी बताया गया कि दृष्टि सामाजिक संस्था को गैर-आवर्ती खर्च के मद में 46 लाख रुपये का भुगतान किया जाना है।
राज्य सरकार ने अदालत को आश्वासन दिया कि केंद्र से प्राप्त धनराशि से अगस्त के अंत तक यह भुगतान कर दिया जाएगा।
पीठ ने लंबित अनुदान छह सप्ताह के भीतर जारी करने का निर्देश देते हुए केंद्र और राज्य सरकार को आपसी समन्वय स्थापित कर समय पर भुगतान की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने को कहा।
अदालत ने सुझाव दिया कि अनुदान अधिकतम दो किश्तों में जारी किया जाना चाहिए।
मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।
भाषा सं आनन्द जितेंद्र
जितेंद्र