नांदेड़ गुरुद्वारा के दशहरा जुलूस पर न्यायालय ने महाराष्ट्र एसडीएमए से निर्णय लेने को कहा

नांदेड़ गुरुद्वारा के दशहरा जुलूस पर न्यायालय ने महाराष्ट्र एसडीएमए से निर्णय लेने को कहा

नांदेड़ गुरुद्वारा के दशहरा जुलूस पर न्यायालय ने महाराष्ट्र एसडीएमए से निर्णय लेने को कहा
Modified Date: November 29, 2022 / 08:19 pm IST
Published Date: October 19, 2020 10:49 am IST

नयी दिल्ली, 19 अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को महाराष्ट्र राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीएमए) से कहा कि वह कोरोना वायरस महामारी के बीच दशहरा जुलूस निकालने के संबंध में नांदेड गुरुद्वारा प्रबंधन बोर्ड के अभिवेदन पर फैसला करे।

न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने कहा कि जमीनी स्थिति के आधार पर निर्णय करना होगा।

दशहरे की छुट्टी के दौरान मामले की सुनवाई के लिए बैठी इस पीठ में न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी भी शामिल थे।

पीठ ने नांदेड़ गुरुद्वारा प्रबंधन को एसडीएमए के समक्ष मंगलवार तक एक अभिवेदन दाखिल करने का भी निर्देश दिया।

उच्चतम न्यायालय ने गुरुद्वारा प्रबंधन से कहा कि अगर वह महाराष्ट्र एसडीएमए के निर्णय से संतुष्ट नहीं होता है, तो वह बम्बई उच्च न्यायालय का रुख कर सकता है।

न्यायालय ‘नांदेड़ सिख गुरुद्वारा सचखंड श्री हजूर अबचलनगर साहिब बोर्ड’ की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था। याचिका में बोर्ड ने तीन सदियों से चली आ रही परम्परा ‘दशहरा, दीपमाला और गुरता गद्दी’ का आयोजन कुछ शर्तों के साथ करने देने की अनुमति मांगी है।

इससे पहले, महाराष्ट्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय से कहा था कि कोविड-19 के बीच नांदेड़ गुरुद्वारे को परम्परा के मुताबिक दशहरा जुलूस निकालने की अनुमति देना ‘‘व्यावहारिक रूप से सही विकल्प’’ नहीं होगा और राज्य सरकार ने वायरस का प्रसार रोकने के लिए धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन को अनुमति नहीं देने का फैसला सोच-समझकर किया है।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने सोमवार को सुनवाई के दौरान कहा कि केन्द्र ने इस मुद्दे पर दिशा-निर्देश जारी किए हैं और राज्य ने भी सीमित संख्या में लोगों के एकत्र होने पर आपत्ति नहीं जताई है।

दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि शादी समारोह में 50 लोगों के शामिल होने की अनुमति दी गई है और गुरुद्वारा प्रबंधक ‘‘जन भागीदारी’’ की अनुमति नहीं मांग रहा है।

पीठ ने कहा, ‘‘आपका तर्क कि राज्य सरकार जुलूस का विरोध नहीं कर रही, यह गलत है।’’

उसने कहा कि जुलूस में 40-50 लोगों के शामिल होने पर कोई आपत्ति नहीं है लेकिन अगर सड़क पर भीड़ बढ़ गई तो उसे कौन नियंत्रित करेगा।

याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि प्रबंधन ने जुलूस मार्ग को 1.5 किमी कर दिया है और कम संख्या में लोग उपस्थित हों, इसे सुनिश्चित करने के लिए इसका आयोजन शाम को किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जुलूस का प्रसारण भी किया जाएगा।

पीठ ने कहा, ‘‘राज्य कह रहा है कि इसमें स्वास्थ्य को खतरा है।’’

राज्य के स्थायी वकील सचिन पाटिल के साथ महाराष्ट्र सरकार की तरफ से अदालत में पेश हुए देवदत्त कामत ने राज्य के साथ-साथ नांदेड़ क्षेत्र में कोविड-19 के मामलों और मौतों की संख्या का उल्लेख करते हुए कहा कि अधिकारियों ने महामारी के बीच किसी भी प्रकार के धार्मिक समारोहों की अनुमति नहीं दी है।

राज्य सरकार ने कहा कि अगर इस जुलूस को अनुमति दी जाएगी, तो अधिकारियों को अन्य धार्मिक समारोहों की भी अनुमति देनी पड़ सकती है।

केन्द्र की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने गृह मंत्रालय के हालिया दिशा-निर्देशों का हवाला दिया और कहा कि यह कुछ शर्तों के साथ 100 लोगों को एक जगह एकत्र होने की अनुमति देता है।

उन्होंने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता तड़के जुलूस निकाल सकता है ताकि केवल धार्मिक समारोह में भाग लेने वाले लोग ही उसमें शामिल हो। अन्यथा बाकी लोग भी सड़क पर होंगे।’’

भाषा निहारिका दिलीप

दिलीप


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