नयी दिल्ली, 28 फरवरी (भाषा) दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को शराब नीति मामले में आरोपमुक्त किए जाने के एक दिन बाद राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने शनिवार को भाजपा पर आरोप लगाया कि वह विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए कानून का ‘‘हथियार’’ के रूप में इस्तेमाल कर रही है।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने उच्चतम न्यायालय से सरकार को यह निर्देश देने का आग्रह किया कि वह कानूनों में संशोधन करे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि गिरफ्तारी तभी की जाए जब मजिस्ट्रेट को कार्रवाई को उचित ठहराने वाले मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्य दिखाए जाएं।
सिब्बल ने सरकार पर पहले गिरफ्तार करने और बाद में सबूत इकट्ठा करने की औपनिवेशिक मानसिकता अपनाने का भी आरोप लगाया।
उनकी यह टिप्पणी दिल्ली की एक अदालत द्वारा केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और 21 अन्य लोगों को राजनीतिक रूप से संवेदनशील शराब नीति मामले में आरोपमुक्त किये जाने और सीबीआई को फटकार लगाते हुए यह कहे जाने के बाद आई है कि उसे नीति में कोई ‘‘व्यापक साजिश या आपराधिक इरादा’’ नहीं मिला।
सिब्बल ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘हम सरकार से पूछना चाहते हैं कि केजरीवाल ने जेल में जो 126 दिन और सिसोदिया ने जेल में जो 503 दिन बिताए, उसकी जिम्मेदारी कौन उठाएगा? जवाबदेही तय होनी चाहिए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘वे (भाजपा) कहते थे कि यह 100 करोड़ रुपये का घोटाला है। न्यायाधीश ने कहा कि यह सोची-समझी साजिश थी। फैसले में कहा गया कि उन्हें आरोपी बनाने की पूर्व-नियोजित साजिश थी और फिर सीबीआई ने तय किया कि इसे कैसे अंजाम दिया जाए।’’
सिब्बल ने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियां एक तय पैटर्न का पालन कर रही हैं, जिसके तहत वे किसी को गिरफ्तार करती हैं और फिर उसी व्यक्ति से किसी अन्य व्यक्ति का नाम आरोपी के रूप में दर्ज कराती हैं, जिसे वे निशाना बनाना चाहती हैं।
उन्होंने जांच एजेंसियों की आलोचना करते हुए कहा, ‘‘वे व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के सामने बयान देने के लिए मजबूर करते हैं ताकि वह दूसरों पर आरोप लगा सके। लेकिन उनके पास कोई सबूत नहीं है और उनका उद्देश्य भाजपा की मदद करना है।’’
सिब्बल ने कहा कि जांच चलती रहती है और लोग जेल में पड़े रहते हैं। उन्होंने विपक्षी नेताओं पी चिदंबरम, हेमंत सोरेन, भूपेंद्र हुड्डा आदि के खिलाफ मामलों का उदाहरण दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘लालू प्रसाद के खिलाफ जो हो रहा है, उसे देखिए। इसमें कोई तथ्य नहीं हैं, यह औपनिवेशिक मानसिकता है। आपने कानून में संशोधन तो किया, लेकिन उन प्रावधानों में कोई बदलाव नहीं किया जिनका आपको इस्तेमाल करना था। आपने कानून का दुरुपयोग करके इसे राजनीतिक नेताओं को निशाना बनाने के लिए हथियार बना दिया है।’’
लालू प्रसाद, अशोक गहलोत, सचिन पायलट, फारूक और उमर अब्दुल्ला तथा महबूबा मुफ्ती का जिक्र करते हुए सिब्बल ने दावा किया कि केवल विपक्षी नेताओं को ही निशाना बनाया जा रहा है।
सिब्बल ने कहा, ‘‘हम भली-भांति जानते हैं कि यह भारत और लोकतंत्र के भविष्य के लिए अच्छा नहीं है। मैं प्रधानमंत्री से अनुरोध करना चाहता हूं कि वे देश की जनता को बताएं कि भ्रष्टाचार नहीं है और जनता ही तय करेगी कि यह सच है या नहीं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘राजनीतिक उद्देश्यों के लिए कानून का दुरुपयोग न करें।’’
सिब्बल ने कहा कि वह इस देश के सभी न्यायिक अधिकारियों, उच्च न्यायालयों और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों से अनुरोध करते हैं कि वे दस्तावेजी साक्ष्यों द्वारा समर्थित न होने वाले निराधार मौखिक बयानों के आधार पर अभियोजन की अनुमति न दें।
उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय को सरकार को कानून में संशोधन करने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश देना चाहिए कि गिरफ्तारी तभी हो सकती है जब मजिस्ट्रेट को मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्य दिखाए जाएं।
भाषा
नेत्रपाल संतोष
संतोष