नयी दिल्ली, 24 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व विधायक नरेश बाल्यान की उस याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई, जिसमें उन्होंने महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) के तहत दर्ज मामले में जमानत देने से इनकार करने के दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी है।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ के समक्ष यह याचिका सोमवार को सुनवाई के लिए आई। पीठ ने दिल्ली पुलिस से याचिका पर चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा।
पूर्व विधायक को मकोका के तहत जबरन वसूली के एक मामले में चार दिसंबर 2024 को गिरफ्तार किया गया था। उसी दिन निचली अदालत ने उन्हें जमानत दे दी थी।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने तीन अगस्त को बाल्यान को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा था कि गैंगस्टर कपिल सांगवान द्वारा संचालित गिरोह के कथित मददगार बाल्यान और गैंगस्टर के बीच हुई बातचीत दोनों के बीच ‘‘सक्रिय आपराधिक संबंध’’ दर्शाती है।
उच्च न्यायालय में जमानत की मांग करते हुए बाल्यान ने दावा किया था कि उनके खिलाफ ‘‘कोई सबूत नहीं’’ है और मामला ‘‘पूरी तरह बेबुनियाद’’ है।
उच्च न्यायालय ने आप नेता की इस दलील को खारिज कर दिया था कि वह खुद पीड़ित थे, उन्होंने गैंगस्टर के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई थीं और राजनीतिक प्रतिशोध के कारण उन्हें सांगवान का करीबी सहयोगी बताया जा रहा है।
उच्च न्यायालय ने कहा था कि अन्य ‘‘आपत्तिजनक सामग्री’’ को देखते हुए सांगवान के खिलाफ बाल्यान की शिकायतें इस स्तर पर उन्हें आरोपों से मुक्त नहीं कर सकतीं। अदालत ने राजनीतिक प्रतिशोध की उनकी दलील को ‘‘पूरी तरह अप्रमाणित’’ बात बताया था।
अदालत ने कहा था कि पुलिस द्वारा एकत्र सामग्री के ‘‘व्यापक आकलन’’ से बाल्यान और गिरोह के अन्य सदस्यों के बीच ‘‘स्पष्ट संबंध’’ नजर आता है।
उच्च न्यायालय ने कहा था कि केवल इस आधार पर कि बाल्यान ने अतीत में कपिल सांगवान के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई थीं, जांच एजेंसी द्वारा एकत्र सामग्री को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब दोनों के बीच हुई बातचीत ‘‘सक्रिय आपराधिक संबंध’’ दर्शाती है।
उच्च न्यायालय ने यह भी कहा था कि गिरोह के खिलाफ 17 प्राथमिकी दर्ज हैं और यह ऐसा मामला नहीं है जिसमें ‘‘लगातार गैरकानूनी गतिविधि’’ का अभाव हो।
बाल्यान ने 27 मई, 2025 को निचली अदालत द्वारा जमानत देने से इनकार किए जाने के बाद उच्च न्यायालय का रुख किया था।
अभियोजन पक्ष ने इससे पहले कहा था कि दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में कथित गिरोह के सदस्यों के खिलाफ 16 प्राथमिकी दर्ज हैं। अभियोजन के अनुसार, गिरोह ने समाज में भय का माहौल पैदा किया और बड़ी मात्रा में अवैध संपत्ति अर्जित की।
भाषा मनीषा वैभव
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