(फाइल फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, 24 अगस्त (भाषा) प्रधान मंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन (पीएमएफएमई) योजना के तहत दो लाख इकाइयों को मंजूरी देने का लक्ष्य हासिल होने के बाद इसे 30 सितंबर की मौजूदा अस्थायी समयसीमा से आगे बढ़ाने की संभावना है। योजना को मौजूदा स्वरूप में या संशोधनों के साथ जारी रखा जा सकता है।
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (एमओएफपीआई) ने केंद्रीय योजना को अगले पांच साल (2026-31) तक जारी रखने का प्रस्ताव दिया है। यह अवधि 16वें वित्त आयोग के कार्यकाल के अनुरूप होगी।
प्रस्ताव में फिलहाल प्रति इकाई 10 लाख रुपये की सीमा वाली ऋण से जुड़ी सब्सिडी की अधिकतम सीमा बढ़ाने तथा महिला उद्यमियों और पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित इकाइयों को प्राथमिकता देने की मांग की गई है।
मूल रूप से वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक के लिए 10,000 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ मंजूर की गई इस योजना को वित्त वर्ष 2025-26 तक बढ़ाया गया था। अब यह अस्थायी रूप से 30 सितंबर तक लागू है।
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने 25 राज्यों के पीएमएफएमई लाभार्थियों के उत्पादों की प्रदर्शनी वाले बाजार का उद्घाटन करने के बाद आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए पीएमएफएमई को ‘‘उन दुर्लभ योजनाओं में से एक बताया, जिसने सही तरीके से लोगों का जीवन बदलने का काम किया है।’’
उन्होंने लाभार्थियों के उदाहरण देते हुए बताया कि बिहार का एक युवक कोविड-19 वैश्विक महामारी के दौरान घर लौटा, उसने इस योजना का लाभ उठाया और अब अपने उत्पादों का निर्यात कर रहा है। वहीं, लद्दाख की एक महिला ने 8,000 रुपये मासिक वेतन से शुरुआत कर कई करोड़ रुपये का कारोबार खड़ा किया है।
पासवान ने कहा, ‘‘ हमने दो लाख इकाइयों का अपना लक्ष्य हासिल कर लिया है… अभी हमें बहुत लंबा रास्ता तय करना है, हमने अभी शुरुआत ही की है।’’
उन्होंने राज्यों के बीच अधिक संतुलित भागीदारी की जरूरत पर जोर दिया।
मंत्री ने कहा कि बिहार, महाराष्ट्र तथा उत्तर प्रदेश ने अच्छा प्रदर्शन किया है और अन्य राज्यों से भी समान प्रयास करने का आह्वान किया, ताकि पहली पीढ़ी के उद्यमियों को तैयार किया जा सके।
उन्होंने पीएमएफएमई 2.0 को अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सुझाव और नीतिगत विचार भी मांगे।
मंत्री ने खाद्य प्रसंस्करण की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि इससे खाद्य पदार्थों की बर्बादी कम करने, किसानों की आय बढ़ाने और भारत को वैश्विक खाद्य आपूर्ति केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के खिलाफ ‘‘गलत’’ धारणा का मुकाबला करने की जरूरत पर भी जोर दिया।
पासवान ने कहा कि 27 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते नए अवसर खोलते हैं और निर्यात बढ़ाने तथा मूल्य श्रृंखला मजबूत करने के लिए खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के सचिव अविनाश जोशी ने कहा कि योजना को मौजूदा स्वरूप में या संशोधित रूप में जल्द ही आगे बढ़ाए जाने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि 30 सितंबर तक अस्थायी विस्तार दिया गया है, लेकिन मुझे विश्वास है कि योजना को उसी स्वरूप में या संशोधित रूप में बहुत जल्द आगे बढ़ाने की घोषणा की जाएगी।’’
उन्होंने बताया कि करीब 41 प्रतिशत लाभार्थी महिला उद्यमी हैं और 80 प्रतिशत से अधिक पहली बार कारोबार शुरू करने वाले लोग हैं।
योजना के तहत 10 लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है। मंजूर की गई इकाइयों में 35-40 प्रतिशत का उन्नयन किया जा चुका है। पिछले दो वर्षों में हुआ खर्च कुल परिव्यय के आधे से अधिक रहा है, जो योजना के तेजी से क्रियान्वयन को दर्शाता है।
जोशी ने यह भी घोषणा की कि प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (पीएमकेएसवाई) के अगले चरण के तहत पीएमएफएमई लाभार्थियों को आगे की सहायता के लिए सामान्य तौर पर लागू दो साल की प्रतीक्षा अवधि से छूट दी जाएगी।
कार्यक्रम में मंत्रालय ने सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों के निर्यात, डिजिटल विपणन एवं ऋण तक पहुंच बढ़ाने के लिए कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा), ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) और नबकिसान फाइनेंस लिमिटेड के साथ तीन समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।
इस अवसर पर पीएमएफएमई पर आधारित पुस्तक ‘स्वाद से समृद्धि’ और त्रैमासिक पत्रिका ‘फूडनोवा’ का भी विमोचन किया गया।
भाषा निहारिका मनीषा
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